नई दिल्ली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे। बाजार में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 से 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 से 0.50 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन ग्राहकों पर पड़ सकता है। खासकर होम लोन लेने वालों के लिए ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी लंबे समय में हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
सबसे बड़ा सवाल- 0.50% रेपो रेट बढ़ा तो EMI कितनी बढ़ेगी?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उपलब्ध कराता है। जब केंद्रीय बैंक इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि रेपो रेट में जितनी बढ़ोतरी होगी, बैंक भी ग्राहक की ब्याज दर में उतनी ही बढ़ोतरी कर दें। इसका असर लोन के बाहरी बेंचमार्क, बैंक के स्प्रेड और रीसेट साइकिल पर निर्भर करता है।
फिर भी अगर उदाहरण के तौर पर ब्याज दर 8.5 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो जाती है, तो 20 साल के होम लोन पर EMI का असर इस तरह समझा जा सकता है।
10 लाख के होम लोन पर कितना बढ़ेगा बोझ?
अगर 10 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 8.5 फीसदी ब्याज दर पर लिया गया है, तो EMI करीब 8,678 रुपये होगी।
ब्याज दर 9 फीसदी होने पर EMI करीब 8,997 रुपये हो जाएगी।
यानी हर महीने लगभग 319 रुपये ज्यादा और सालभर में करीब 3,828 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।
20 लाख के लोन पर EMI में कितना फर्क?
20 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन पर 8.5 फीसदी ब्याज के हिसाब से EMI करीब 17,356 रुपये बैठती है।
अगर ब्याज दर बढ़कर 9 फीसदी हो जाती है तो EMI करीब 17,995 रुपये पहुंच जाएगी।
इस तरह मासिक किस्त में करीब 638 रुपये और सालाना भुगतान में लगभग 7,656 रुपये का इजाफा होगा।
30 लाख का होम लोन: हर महीने करीब 957 रुपये ज्यादा
30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5 फीसदी की दर से EMI करीब 26,035 रुपये है।
अगर ब्याज दर 9 फीसदी हो जाती है तो EMI बढ़कर करीब 26,992 रुपये हो जाएगी।
यानी हर महीने करीब 957 रुपये अतिरिक्त और सालभर में लगभग 11,484 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ेंगे।
40 लाख के लोन पर बढ़ेगी EMI
40 लाख रुपये के 20 साल के होम लोन पर 8.5 फीसदी ब्याज के हिसाब से EMI करीब 34,713 रुपये है।
9 फीसदी ब्याज दर होने पर यही EMI करीब 35,989 रुपये हो जाएगी।
इसका मतलब है कि हर महीने करीब 1,276 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। सालभर में यह अतिरिक्त बोझ करीब 15,312 रुपये होगा।
50 लाख के होम लोन पर सबसे ज्यादा असर
50 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5 फीसदी की दर से EMI करीब 43,391 रुपये बैठती है।
अगर ब्याज दर 9 फीसदी हो जाती है तो EMI बढ़कर करीब 44,986 रुपये हो जाएगी।
यानी हर महीने करीब 1,595 रुपये ज्यादा और सालभर में लगभग 19,140 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।
8.5% से 9% ब्याज होने पर 20 साल के होम लोन का असर
| लोन राशि | 8.5% पर EMI | 9% पर EMI | मासिक अतिरिक्त बोझ |
|---|---|---|---|
| 10 लाख | ₹8,678 | ₹8,997 | ₹319 |
| 20 लाख | ₹17,356 | ₹17,995 | ₹639 |
| 30 लाख | ₹26,035 | ₹26,992 | ₹957 |
| 40 लाख | ₹34,713 | ₹35,989 | ₹1,276 |
| 50 लाख | ₹43,391 | ₹44,986 | ₹1,595 |
पर्सनल लोन वालों पर भी पड़ सकता है असर
पर्सनल लोन की ब्याज दरें आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12 फीसदी ब्याज दर पर लिया है, तो उसकी EMI करीब 11,122 रुपये होगी।
अगर ब्याज दर 12.5 फीसदी हो जाती है तो नए हिसाब से EMI करीब 11,249 रुपये हो सकती है।
यानी मासिक किस्त में करीब 127 रुपये का अंतर आएगा। रकम छोटी लग सकती है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति पर एक साथ होम लोन और पर्सनल लोन चल रहा है तो कुल मासिक खर्च बढ़ सकता है।
EMI बढ़ेगी या लोन की अवधि? बैंक क्या कर सकता है
रेपो रेट बढ़ने के बाद फ्लोटिंग रेट वाले लोन में जरूरी नहीं कि बैंक हमेशा EMI ही बढ़ाए। कई मामलों में बैंक ग्राहक की EMI को लगभग समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं।
यानी ग्राहक को तत्काल ज्यादा EMI नहीं देनी पड़ेगी, लेकिन लोन लंबे समय तक चलता रहेगा और कुल ब्याज भुगतान बढ़ सकता है।
दूसरा विकल्प EMI बढ़ाना होता है। इससे हर महीने जेब पर ज्यादा बोझ पड़ता है, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है और लंबे समय में ब्याज का बोझ अपेक्षाकृत कम रह सकता है।
क्या रेपो रेट बढ़ते ही आपकी EMI बढ़ जाएगी?
जरूरी नहीं। इसका असर आपके लोन के प्रकार, ब्याज दर के बेंचमार्क, बैंक के स्प्रेड और रीसेट साइकिल पर निर्भर करेगा।
इसलिए RBI की MPC घोषणा के बाद फ्लोटिंग रेट वाले लोन ग्राहकों को अपने बैंक की नई ब्याज दर और अगले रीसेट की तारीख जरूर देखनी चाहिए।
आम ग्राहक के लिए सबसे अहम बात
अगर RBI रेपो रेट में 0.25 से 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी करता है, तो इसका असर सिर्फ बाजार या बैंकों तक सीमित नहीं रहेगा। फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले करोड़ों ग्राहकों की EMI या लोन की अवधि पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
खासकर बड़े होम लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी हर महीने सैकड़ों से हजारों रुपये का फर्क पैदा कर सकता है। इसलिए RBI के फैसले के बाद सबसे जरूरी है कि ग्राहक अपनी नई ब्याज दर, EMI और बचे हुए लोन टेन्योर का हिसाब जरूर जांचें।