उत्तर प्रदेश की रणजी टीम एक बार फिर घरेलू क्रिकेट के मंच पर अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। हर सत्र के बाद कहानी वही दोहराई जाती है, हार, समीक्षा, आलोचना और फिर अगले सत्र से पहले नई रणनीति के दावे। लेकिन मैदान पर नतीजे जस के तस रहते हैं।
इस बार भी रणजी ट्रॉफी से बाहर होने के बाद सवाल सीधे कोचिंग, कप्तानी और चयन नीति पर उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या यूपी के चीफ कोच अरविंद कपूर भी ‘लगातार प्रयोग’ वाले उस ट्रैक पर चल पड़े हैं, जिसने हाल के दिनों में भारतीय टेस्ट टीम को भी भारी नुकसान पहुंचाया?
अब तक यूपी क्रिकेट में यह धारणा रही है कि टीम को बाहरी कोच की जरूरत नहीं। ऐसे में इस सत्र रेलवे और उत्तर प्रदेश की ओर से कुल 15 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले अरविंद कपूर को चीफ कोच बनाना अपने आप में बड़ा फैसला था।
लेकिन इस फैसले से कोई चमत्कार नहीं हुआ। यूपी की टीम एक बार फिर रणजी ट्रॉफी से बाहर हो गई और सूबे के क्रिकेट फैंस निराश नजर आए।
आरोप यह भी लगे कि कोच नियुक्ति के वक्त कई अनुभवी और योग्य नामों की अनदेखी की गई। सीजन शुरू होने से पहले ही विवादों की नींव पड़ गई थी और उसका असर पूरे टूर्नामेंट में दिखा।
बीच सीजन कप्तानी परिवर्तन: सही फैसला या जल्दबाज़ी?
सीजन की खराब शुरुआत के बाद चयन समिति (प्रवीण कुमार की अगुआई में) ने बड़ा कदम उठाते हुए कप्तान करण शर्मा को बीच सत्र में बाहर कर दिया।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो करण शर्मा का प्रदर्शन कई अन्य खिलाड़ियों से बेहतर था। इसके बावजूद विकेटकीपर-बल्लेबाज़ आर्यन जुयाल को कप्तान बनाया गया, लेकिन यह बदलाव भी टीम को नॉकआउट तक नहीं पहुंचा सका। यही वह बिंदु है जहां कोच और चयन समिति की सामूहिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े होते हैं।
ज़ीशान अंसारी की अनदेखी: सबसे बड़ा मिसफायर
टीम चयन में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेग स्पिनर ज़ीशान अंसारी को लेकर रहा। तीन लगातार यूपी टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें शुरुआत में सिर्फ नेट बॉलर के रूप में सीमित रखा गया।
विडंबना यह रही कि जब आख़िरी दो मैचों में उन्हें टीम में शामिल किया गया, तब तक वह चोटिल हो चुके थे और रिहैब के लिए बाहर चले गए। विजय हज़ारे ट्रॉफी में 21 विकेट लेने वाले इस गेंदबाज़ की अनुपस्थिति ने यूपी की गेंदबाज़ी को साफ तौर पर कमजोर कर दिया।
दूसरे फॉर्मेट में भी वही कहानी
रणजी ही नहीं, इससे पहले सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में भी बार-बार किए गए बदलाव टीम पर भारी पड़े।हालांकि विजय हज़ारे ट्रॉफी में यूपी ने सभी सात लीग मैच जीते, लेकिन क्वार्टरफाइनल में सौराष्ट्र के खिलाफ हारकर बाहर हो गई यानी बड़े मैचों में फिर वही मानसिक और रणनीतिक चूक।
विदर्भ मैच ने खोल दी तस्वीर
विदर्भ के खिलाफ मुकाबले में पहली पारी में दोनों टीमें 237 रन पर सिमट गई थीं, जिससे रोमांच की उम्मीद जगी।
लेकिन दूसरी पारी में यूपी सिर्फ 200 रन ही बना सकी। जवाब में विदर्भ ने 91/4 से आगे खेलते हुए लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया। अमन मोखाडे (83) और दनिश मलावर (54) की साझेदारी ने यूपी की वापसी की संभावनाओं पर विराम लगा दिया।
चार विकेट की जीत के बावजूद विदर्भ भी नॉकआउट में जगह नहीं बना सका और टाई-ब्रेक में झारखंड से पीछे रह गया।
ग्रुप से आंध्र प्रदेश और झारखंड ने क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया।
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