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अयोध्या/नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी के मामले ने अब एक गंभीर प्रशासनिक और देशव्यापी राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में आए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस समय तीर्थ क्षेत्र पुरम में एकांतवास पर हैं।
लगातार लग रहे आरोपों और उठ रहे सवालों के बीच भावुक होते हुए चंपत राय ने अपने बेहद करीबियों से कहा, “अयोध्या में मेरी सेवा पूरी हो चुकी है, भव्य मंदिर भी बन गया है। लेकिन मैं अपने ऊपर कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाऊँगा।”
80 वर्षीय चंपत राय इस समय तीर्थ क्षेत्र पुरम के एक बेहद साधारण से कमरे में रह रहे हैं। उनके करीबियों के मुताबिक, ट्रस्ट की साख पर उठे सवालों के बाद से वह गहरे सदमे में हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने एक करीबी का नाम लेते हुए कहा, “टिन्नू यादव ने मुझे धोखा दे दिया, मुझे उससे ऐसी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।”
जब मिलने आए लोगों ने चंपत राय के गिरते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई, तो उन्होंने अपने बिस्तर के पास रखी भगवान राम की मूर्ति की ओर इशारा करते हुए कहा, “मुझे किस बात की चिंता? अगर ये आरोप उन्होंने (राम जी) लगवाए हैं, तो वही इसे हटाएंगे भी।” सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय इस समय एसआईटी (SIT) की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वह सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखेंगे।
इस महाविवाद के बीच एक भाजपा विधायक का बेहद कड़ा और विवादित बयान सामने आया है। विधायक ने चोरों को श्राप देते हुए कहा, “जिसने भी प्रभु श्री राम के मंदिर से चोरी की है, उसे कैंसर हो जाएगा। उसे कानून की जरूरत नहीं, खुद भगवान मौत की सजा देंगे।”
इस मामले को लेकर अब विपक्ष पूरी तरह आक्रामक हो चुका है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बड़ा दावा किया है। केजरीवाल ने कहा:
“कुछ दिन पहले मुझे श्री राम मंदिर के चढ़ावे से संबंधित कुछ बेहद संवेदनशील जानकारियां मिली थीं। पहले मुझे यकीन नहीं हुआ, लेकिन पिछले कुछ दिनों में जब मैंने उन तथ्यों की पुष्टि की, तो वे पूरी तरह सही निकले। मैं जल्द ही वह सारी जानकारी देश की जनता के सामने साझा करूँगा।”
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने इस घोटाले में बड़े नामों के शामिल होने का आरोप लगाया है। रामगोपाल ने कहा, “मंदिर चढ़ावे की इस हेराफेरी में अकेले चंपत राय शामिल नहीं हैं, बल्कि इसमें बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। राम मंदिर आंदोलन के समय जब हमारे घर लोग चंदा मांगने आए थे, तो हमने भी चंदा दिया था, लेकिन उस समय के करोड़ों के चंदे का आज तक कोई हिसाब-किताब नहीं है।”
सियासी मायने: यूपी पुलिस की जांच, ED की संभावित एंट्री और अब विपक्ष के चौतरफा हमलों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट बैकफुट पर है। सबकी नज़रें अब SIT की आने वाली फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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