- जनसंघ से बीजेपी तक का लंबा राजनीतिक सफर
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के करीबी थे आरके सिन्हा
- SIS ग्रुप के संस्थापक के निधन पर बिहार के राजनीतिक गलियारों में शोक
लखनऊ/पटना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नोएडा स्थित आवास पर निधन हो गया। वह करीब 75 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बताया जा रहा है कि ब्रेन स्ट्रोक के बाद वह लंबे समय तक कोमा में रहे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
आरके सिन्हा को भारतीय राजनीति में जनसंघ के दौर से सक्रिय रहने वाले नेताओं में गिना जाता था। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ उनकी करीबी राजनीतिक संबंधों की चर्चा भी होती रही है।
पटना में होंगे अंतिम दर्शन, नोएडा से लाया जाएगा पार्थिव शरीर
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आरके सिन्हा का निधन नोएडा स्थित उनके आवास पर हुआ। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए नोएडा से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
परिवार ने शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा उनके अभिभावक थे। परिवार ने लोगों से दिवंगत आत्मा की शांति और इस कठिन समय में परिजनों को संबल देने की प्रार्थना करने की अपील की है।
जनसंघ से बीजेपी तक ऐसा रहा आरके सिन्हा का राजनीतिक सफर
आरके सिन्हा का राजनीतिक जीवन जनसंघ के दौर से शुरू हुआ था। वह बीजेपी के गठन के समय से ही संगठन से जुड़े रहे और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में अपनी जगह बनाई।
साल 2014 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया। इसके बाद वह 2020 तक उच्च सदन के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके संबंधों को पार्टी के पुराने राजनीतिक दौर की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता था।
राजनीति के साथ कारोबार में भी बनाई पहचान, SIS ग्रुप के थे संस्थापक
आरके सिन्हा केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कारोबार की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। वह SIS ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन थे। यह कंपनी सुरक्षा और सर्विस सेक्टर में काम करती है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी व्यावसायिक मौजूदगी रखती है।
राजनीति और उद्योग जगत दोनों में उनकी सक्रियता के कारण उनका प्रभाव व्यापक रहा। उनके निधन को राजनीतिक और कारोबारी जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
JDU और बिहार बीजेपी ने दी श्रद्धांजलि
आरके सिन्हा के निधन पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त किया। पार्टी ने अपने संदेश में कहा कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता, SIS के संस्थापक और पूर्व सांसद का निधन राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। जेडीयू परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
वहीं, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जनसंघ और बीजेपी के वरिष्ठ नेता के रूप में आरके सिन्हा का संगठन के प्रति समर्पण और विचारों के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी।
संजय सरावगी ने उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन को याद करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
आरके सिन्हा के निधन से बीजेपी ने अपने एक पुराने और अनुभवी नेता को खो दिया है। उनका राजनीतिक सफर जनसंघ के दौर से शुरू होकर राज्यसभा तक पहुंचा, वहीं कारोबार के क्षेत्र में SIS ग्रुप के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।