दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक की जमानत रद्द करने की मांग, बिहार सरकार ने हलफनामे में कहा- जांच में आरोप सही पाए गए, जनवरी 2026 में दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
पटना। बिहार की राजनीति में बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत को लेकर अब बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि मामले की जांच के दौरान अनंत सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने पटना हाई कोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत रद्द करने की मांग भी की है।
इस मामले ने बिहार की सियासत में इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि कुछ समय पहले तक अनंत सिंह सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ थे, लेकिन विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ खुलकर प्रचार करने के बाद उनके राजनीतिक रिश्तों में तल्खी आ गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने गिनाए 62 आपराधिक मामले
दुलारचंद यादव के पोते नीरज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया।
सरकार ने अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में दाखिल हलफनामे में बताया कि मोकामा विधायक अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कुल 62 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी के बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह समेत तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस मामले में मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम भी आरोपी हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा में हुई थी। उस समय अनंत सिंह JDU के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। इसी दौरान चुनावी गतिविधियों के बीच अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद अनंत सिंह समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीत लिया। मार्च 2026 में उन्हें पटना हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
अब बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत रद्द करने की मांग उठाकर इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
MLC चुनाव में बगावत के बाद JDU ने किया था निष्कासित
अनंत सिंह और JDU के बीच राजनीतिक टकराव की कहानी भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है। पटना स्नातक MLC चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन किया था।
उन्होंने खुले तौर पर जन सुराज उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया और JDU प्रत्याशी के खिलाफ कई बयान भी दिए। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह के खिलाफ सख्त रुख चर्चा का विषय बन गया है।
आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। ऐसे में अदालत का रुख इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
फिलहाल, बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और हत्याकांड की जांच से जुड़े तथ्यों को आधार बनाकर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके संभावित फैसले पर टिकी हैं।