- जनाजे से गायब वारिस: सुरक्षा कारणों से पिता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल नहीं हो पाए मुज्तबा खामेनेई
- इज़राइल का डर: ईरानी सुरक्षा अधिकारियों को अंदेशा है कि मुज्तबा के सामने आते ही इज़राइल उन्हें निशाना बना सकता है
- बड़ा पारिवारिक नुकसान: 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इज़राइल के हमले में मुज्तबा ने अपने पिता, पत्नी और बेटे को खो दिया था
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा संकट खड़ा हो गया है। तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला में हुए अली खामेनेई के नमाज-ए-जनाजा (अंतिम संस्कार) में पूरी ईरानी लीडरशिप तो शामिल हुई, लेकिन उनके वारिस और नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) कहीं नजर नहीं आए। जनाजे की नमाज में खामेनेई के सिर्फ तीन बेटे ही शामिल हुए।
एक सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई खुद अपने पिता के जनाजे में शामिल होना चाहते थे, लेकिन ईरान की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी इस गुजारिश को सिरे से ठुकरा दिया। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह इज़राइल (Israel) का खौफ है। सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि अगर मुज्तबा सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो इज़राइल उनकी हत्या कर सकता है या उनके सीक्रेट बंकर (छिपने की जगह) का पता लगा सकता है।
28 फरवरी के बाद से लापता: पत्नी की शोक सभा में भी नहीं आए नजर
मुज्तबा खामेनेई को आखिरी बार 28 फरवरी को देखा गया था, जब अमेरिका और इज़राइल के एक भीषण संयुक्त हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी हमले में उनके पिता अली खामेनेई, उनकी पत्नी और उनके बेटे की मौत हो गई थी।
सुरक्षा का घेरा इतना सख्त है कि मुज्तबा हाल ही में तेहरान में हुई अपनी पत्नी की शोक सभा में भी शामिल नहीं हो सके। अब वे 9 जुलाई को मशहद में होने वाले पिता के अंतिम संस्कार को देखने की जिद कर रहे हैं, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सूत्रों के मुताबिक, उन्हें इसकी इजाजत मिलने की संभावना न के बराबर है।
मुज्तबा के गायब होने से गहराया ईरान का संकट, कट्टरपंथियों ने दी कूटनीति का विरोध करने की धमकी
मुज्तबा खामेनेई के लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने न आने के कारण अब ईरान के भीतर उनके शासन और वजूद को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। भले ही खामेनेई के नाम से जारी एक लिखित बयान में अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत को मंजूरी दी गई है, लेकिन ईरान का कट्टरपंथी खेमा बगावत पर उतर आया है।
ईरानी कट्टरपंथी नेताओं ने साफ कसम खाई है कि जब तक मुज्तबा खुद सार्वजनिक रूप से सबके सामने नहीं आते या अपनी आवाज की कोई ताजा ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग जारी नहीं करते, तब तक वे अमेरिका के साथ किसी भी कूटनीति का विरोध करेंगे।
वार्ताकारों को मौत की सजा देने की मांग!
ईरान के भीतर चल रही इस अंदरूनी खींचतान ने अब हिंसक रूप ले लिया है। कट्टरपंथियों ने ईरान के कंजर्वेटिव खेमे के उन गुटों और ईरानी वार्ताकारों (Negotiators) पर मुकदमा चलाने और यहां तक कि उन्हें मौत की सजा देने की मांग शुरू कर दी है, जो खुद को व्यावहारिक (प्रैग्मैटिस्ट) मानते हैं और अमेरिका के साथ शांति वार्ता की वकालत कर रहे हैं। साफ है कि सुप्रीम लीडर का बंकर में छुपा होना ईरान को एक बड़े गृहयुद्ध या तख्तापलट की तरफ धकेल रहा है।