चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को स्थानांतरित करने और सड़क निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया। डीएमके और टीवीके विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विपक्ष को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें मजबूर न किया जाए, अन्यथा वह पिछली डीएमके सरकार से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइलें सार्वजनिक कर देंगे। मुख्यमंत्री का यह बयान विधानसभा में लगातार दूसरे दिन हुए तीखे हंगामे के दौरान आया।
सीएम बोले- सही समय पर सबके सामने रखूंगा फाइलें
विधानसभा में जारी बहस के दौरान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कहा कि उचित समय आने पर वह पिछली डीएमके सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी दो फाइलें मौजूद हैं और उन्हें अभी ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाए।
सीएमओ शिफ्ट करने के फैसले पर शुरू हुआ विवाद
इससे एक दिन पहले विधानसभा में डीएमके नेता ईवी वेलु और लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए जारी 5.54 करोड़ रुपये के कथित टेंडर को लेकर तीखी बहस हुई थी। ईवी वेलु ने सवाल उठाया कि टेंडर की जानकारी अखबारों में प्रकाशित हुई, लेकिन सरकारी वेबसाइट पर क्यों नहीं डाली गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों ने उनसे पूछा कि यदि मुख्यमंत्री नए परिसर में चले जाएंगे तो वहां कर्मचारियों के आराम और भोजन की व्यवस्था कैसे होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।
सड़क निर्माण में कथित गड़बड़ियों पर फिर गरमाया सदन
बुधवार को विधानसभा में सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा, जिस पर डीएमके और टीवीके के विधायकों के बीच फिर से तीखी बहस हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद सदन का माहौल काफी गर्म हो गया।
कहां स्थानांतरित होगा मुख्यमंत्री कार्यालय
फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय चेन्नई स्थित फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में विधानसभा भवन के भीतर संचालित होता है। राज्य सरकार की योजना इसे सचिवालय परिसर में स्थित 10 मंजिला नमक्कल कविग्नार मालिगई भवन में स्थानांतरित करने की है। इस भवन का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री कलैगनार के कार्यकाल में कराया गया था।
मंत्री ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने डीएमके के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल संदेह पैदा करने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय को स्थानांतरित करने का फैसला किसी निजी सुविधा के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिसर में पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अन्य गणमान्य लोगों के लिए वहां उचित स्वागत कक्ष भी उपलब्ध नहीं है, इसलिए नए भवन में कार्यालय स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
‘मुख्यमंत्री होटल या वैन में भी रह सकते हैं’
मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए आधव अर्जुन ने कहा कि यह फैसला किसी प्रकार की विलासिता के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि जोसेफ विजय इतने सहज स्वभाव के हैं कि जरूरत पड़ने पर होटल या वैन में भी आराम से रह सकते हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उसे सार्वजनिक नहीं किया गया था। उनका कहना था कि यदि ‘शेड्यूल ऑफ रेट्स’ पहले ही जारी कर दिया जाता तो ठेकेदार कीमतें बढ़ा सकते थे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार इस पूरे मामले पर जल्द ही विस्तृत श्वेत पत्र जारी करेगी।