Highlights
• महिला आरक्षण और परिसीमन पर विशेष सत्र की अटकलों को सरकार ने खारिज किया
• किरेन रिजिजू बोले- कोई प्रस्ताव नहीं, मानसून सत्र में ही कोशिश
• 2029 चुनाव से 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना
• लोकसभा सीटें बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव
• विपक्ष, खासकर दक्षिणी राज्यों का कड़ा विरोध
• संसद में हंगामे के कारण बिलों पर चर्चा प्रभावित
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां पहले 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने की चर्चाएं थीं, वहीं अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और फिलहाल विशेष सत्र बुलाने की योजना नहीं बनाई गई है।
सरकार अब मौजूदा मानसून सत्र में ही संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है। इस विधेयक के तहत 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान किया गया है।
सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
इस मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार को भी दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सूत्रों के मुताबिक, इसी कड़ी में किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर विधेयक पर चर्चा की, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई।
मानसून सत्र में हंगामे का असर
20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम चरण में है और 13 अगस्त को समाप्त होगा। लेकिन यह सत्र नीतिगत बहस के बजाय राजनीतिक टकराव और हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया। पेपर लीक और चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के चलते संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
परिसीमन पर क्यों बढ़ा विवाद?
परिसीमन विधेयक को लेकर सबसे ज्यादा विवाद देखने को मिल रहा है। विपक्ष, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों का कहना है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों में बढ़ोतरी से उत्तर भारत को अधिक लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए विपक्ष बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के इस बिल को पास करने के पक्ष में नहीं है।
वहीं, सरकार इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से लगातार बातचीत कर रही है, ताकि मानसून सत्र के दौरान ही इस अहम विधेयक को पारित कराया जा सके।