नई दिल्ली: बिना थर्ड पार्टी बीमा के सड़क पर दौड़ रहे वाहनों पर अब बड़ी सख्ती की तैयारी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सुझाव दिया है कि बिना वैध बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगाने की संभावना पर विचार किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी गाड़ियों की पहचान करना संभव है। इस सुझाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर सरकार को कैसे पता चलेगा कि किस वाहन का बीमा है और किसका नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने थर्ड पार्टी बीमा को लेकर अहम निर्देश देते हुए दोपहिया वाहनों के लिए अनिवार्य बीमा अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष और चारपहिया वाहनों के लिए 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी है। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं।
बिना बीमा वाले वाहन कैसे पकड़ में आएंगे?
अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे अहम भूमिका निभा सकते हैं। ये कैमरे सड़क से गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट पढ़कर उन्हें सरकारी डेटाबेस से मिलाते हैं और कुछ ही सेकंड में वाहन की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। इसी तकनीक के जरिए यह भी पता लगाया जा सकता है कि वाहन का बीमा वैध है या नहीं।
क्या है ANPR कैमरा और कैसे करता है काम?
ANPR एक स्मार्ट कैमरा प्रणाली है, जो वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर उसे डिजिटल डेटा में बदल देती है। इसके बाद यह जानकारी सरकारी रिकॉर्ड, जैसे VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) के डेटाबेस से मिलाई जाती है। यदि वाहन का बीमा समाप्त हो चुका है या उपलब्ध नहीं है, तो सिस्टम तुरंत इसकी पहचान कर सकता है।
यह तकनीक तेज रफ्तार से गुजरते वाहनों की नंबर प्लेट भी पढ़ सकती है और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करती है।
अदालत ने सरकार को क्या सुझाव दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को निर्देश दिया है कि वे कुछ राज्यों में ANPR कैमरों को VAHAN और IIB के डेटाबेस से जोड़ने की संभावनाओं पर काम करें। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान कर ई-चालान जारी किए जा सकेंगे और भविष्य में ईंधन वितरण से जुड़ी व्यवस्था भी विकसित की जा सकती है।
अदालत का मानना है कि यदि बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा, तो लोग समय पर बीमा कराने के लिए भी प्रेरित होंगे और सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
क्या अभी से UPI की तरह कोई नया नियम लागू हो गया है?
नहीं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को केवल इस विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया है। बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल देने पर रोक संबंधी कोई नया नियम अभी लागू नहीं हुआ है। यदि सरकार भविष्य में ऐसा निर्णय लेती है, तो उसके लिए अलग से नीति और अधिसूचना जारी करनी होगी।
ANPR कैमरों का अभी कहां होता है इस्तेमाल?
देश के अधिकांश हाईवे, एक्सप्रेसवे, टोल प्लाजा और बड़े शहरों की सड़कों पर ANPR कैमरों का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। इन्हीं कैमरों की मदद से ट्रैफिक नियम उल्लंघन पर ई-चालान जारी किए जाते हैं। कई स्थानों पर बैरियर-फ्री टोल प्रणाली में भी यही तकनीक वाहनों की पहचान कर स्वचालित शुल्क वसूली में उपयोग की जा रही है।