बीजेपी की ओर झुके पवन सिंह
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. मंगलवार को उन्होंने लगातार तीन बड़ी राजनीतिक हस्तियों से मुलाकात कर सियासी हलचल बढ़ा दी. दिन की शुरुआत राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से आशीर्वाद लेकर हुई. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की और अंत में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की. इन तीनों बैठकों की तस्वीरें पवन सिंह ने एक्स (ट्विटर) पर साझा कीं और एक पोस्ट के ज़रिए अपना राजनीतिक संदेश भी दिया.
जाति राजनीति पर निशाना, विकास की बात
पवन सिंह ने लिखा— “तस्वीरें देखकर जातिवादी राजनीति करने वालों को तकलीफ़ हो रही होगी. लेकिन जो लोग विकसित बिहार का सपना देखते हैं, वो किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे.”
उन्होंने आगे कहा कि अमित शाह, जेपी नड्डा और उपेंद्र कुशवाहा ने उन्हें आशीर्वाद दिया है. अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विजन को पूरा करने का प्रण दोहराते हुए लिखा— “आपका बेटा पवन बिहार के विकास के लिए पूरा पावर लगाएगा.”
राजनीतिक गलियारों में अब यह साफ हो चुका है कि पवन सिंह ने आधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन थाम लिया है. सूत्र बताते हैं कि बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े और वरिष्ठ नेता ऋतुराज सिन्हा की पहल पर पहले उन्हें उपेंद्र कुशवाहा से मिलवाया गया. कुशवाहा ने उन्हें न सिर्फ शुभकामनाएं दीं बल्कि समर्थन का भरोसा भी जताया. बताया जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पवन सिंह बीजेपी कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय भूमिका निभाएंगे.
अमित शाह से उनकी 30 मिनट की मुलाकात को भी बेहद अहम माना जा रहा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक पवन सिंह की राजनीतिक नियुक्ति सिर्फ एक चेहरे की एंट्री नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति है.
कराकाट से हार के बाद बदला समीकरण लगभग दो दर्जन सीटों पर असर की उम्मीद
लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने कराकाट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार ताल ठोकी थी, जबकि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए उम्मीदवार थे. दोनों हार गए और सीट महागठबंधन के खाते में गई. अब माना जा रहा है कि बीजेपी में पवन की वापसी और कुशवाहा की मौजूदगी शाहाबाद और मगध क्षेत्र में एनडीए की पकड़ मजबूत कर सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन सिंह की एंट्री शाहाबाद और मगध की तकरीबन दो दर्जन सीटों को प्रभावित कर सकती है. आरा, बक्सर, रोहतास, कैमूर और जहानाबाद जैसे इलाकों में राजपूत और कुशवाहा वोटर्स के बीच चल रही दरार कम हो सकती है. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था. माना जा रहा है कि पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा की एकजुटता से सामाजिक समीकरण नए सिरे से बनेंगे और बीजेपी को सीधा फायदा होगा.
बिहार में अब चुनाव से पहले पवन सिंह की राजनीतिक पारी चर्चा का सबसे गर्म विषय बन चुकी है—निशाना किस पर है और अगला कदम क्या होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों…
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर…
नई दिल्ली: म्यांमार में फरवरी 2021 में आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली निर्वाचित…
दुबई: मध्य पूर्व में जारी युद्ध और तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार के लिए…
कीव: यूक्रेन में लगातार हो रहे रूसी हवाई हमलों के बीच देश ने यूरोपीय देशों…
मुंबई: रणबीर कपूर के जन्मदिन पर ‘रामायण’ के मेकर्स ने फिल्म की मेकिंग से जुड़ी…