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NEET UG 2027: OMR खत्म, कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लागू-CUET-JEE जैसा होगा फॉर्मेट?

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने री-एग्जाम की तारीख का ऐलान कर दिया है। 3 मई को हुई धांधली के बाद रद्द की गई यह परीक्षा अब 21 जून 2026 को आयोजित होगी। अभ्यर्थियों के पास तैयारी के लिए अब एक महीने से अधिक का समय है, जिससे वे अपने स्कोर में सुधार कर सकते हैं।

CBI की रडार पर ‘माफिया’, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

नीट पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी कमान सीबीआई (CBI) को सौंपी गई है। जांच एजेंसी अब तक जयपुर, गुरुग्राम और नासिक जैसे शहरों से मंगीलाल बिवाल और यश यादव समेत कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। उधर, मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है, जहाँ एनटीए के पुनर्गठन और परीक्षा प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

बड़ा बदलाव: अगले साल से ‘डिजिटल’ होगा नीट का भविष्य

पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक क्रांतिकारी कदम की घोषणा की है। अगले सत्र से नीट यूजी परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में होगी। अब तक यह परीक्षा पेन-पेपर (OMR) मोड में होती थी, लेकिन अब इसे JEE (Main) और CUET की तर्ज पर पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया जाएगा।

चुनौतियां: 22 लाख छात्र और कंप्यूटर सेंटरों का संकट

हालांकि, इस बदलाव को लागू करना एनटीए के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  1. अभ्यर्थियों की भारी संख्या: इस साल नीट के लिए रिकॉर्ड 22.79 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इतनी बड़ी संख्या के लिए एक साथ कंप्यूटर सेंटर जुटाना एक बड़ी बाधा है।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि देश में फिलहाल इतने बड़े पैमाने पर हाई-स्पीड इंटरनेट और कंप्यूटर लैब्स नहीं हैं कि 22 लाख छात्रों की परीक्षा कुछ ही दिनों में पूरी कराई जा सके।
  3. लंबा समय: एनटीए के अधिकारियों के मुताबिक, यदि परीक्षा ऑनलाइन मोड में होती है, तो इसे पूरा करने में कम से कम 20 दिन का समय लग सकता है।
  4. ग्रामीण क्षेत्र: शहरों में तो डिजिटल सेंटर उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए सीबीटी मोड के सेंटर तक पहुँचना और वहां संसाधनों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
  5. सरकार का डिजिटल मोड की ओर बढ़ना पारदर्शिता की दिशा में एक सही कदम है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या एनटीए अगले एक साल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी संसाधनों को दुरुस्त कर पाता है या नहीं।

news desk

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