धार/भोपाल। धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला को लेकर आए हाई कोर्ट के फैसले ने देश में एक नई वैचारिक बहस छेड़ दी है। मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह और विपक्षी नेता असदुद्दीन ओवैसी के बयानों ने इस मुद्दे के दोनों पहलुओं को स्पष्ट कर दिया है।
धार भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर माना। जज ने कहा कि हम सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने कोर्ट की सहायता की। हमने तथ्यों को देखा, ASI एक्ट को देखा। आर्कियोलॉजी एक विज्ञान है। उसके आधार पर मिले निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है। साथ ही संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को भी देखा जाना है। यह परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। देवी सरस्वती का मंदिर था।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सिंह ने हाई कोर्ट के फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की बड़ी उपलब्धि करार दिया।
दूसरी तरफ, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण बताया है।
भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है। धार शहर की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अराजकता या शांति भंग करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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