नई दिल्ली: आज 21 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रावण शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी, मां संतोषी और शुक्र देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आज चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र के बाद ज्येष्ठ नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ऐसे में आइए जानते हैं आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी।
21 अगस्त 2026 का पंचांग
आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। यह तिथि रात 11 बजकर 36 मिनट तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। आज शुक्रवार का दिन है और संवत 2083 चल रहा है।
योग की बात करें तो वैधृति योग अगले दिन 22 अगस्त की सुबह 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विषकुंभ योग शुरू होगा। करण में बालव सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इसके बाद कौलव करण रात 11 बजकर 36 मिनट तक रहेगा और फिर तैतिल करण शुरू होगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
आज सूर्योदय सुबह 5 बजकर 53 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 55 मिनट पर होगा। चंद्रमा के उदय का समय दोपहर 2 बजकर 12 मिनट है। वहीं चंद्रमा 22 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजकर 10 मिनट पर अस्त होंगे।
सूर्य और चंद्रमा की राशि
आज सूर्य देव सिंह राशि में विराजमान हैं। वहीं चंद्र देव वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे।
आज के शुभ मुहूर्त
शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल 22 अगस्त की सुबह 4 बजकर 56 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल और आज के अशुभ समय
आज शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य शुरू करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।
गुलिकाल सुबह 7 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। यमगंड का समय दोपहर 3 बजकर 39 मिनट से शाम 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
आज अनुराधा के बाद ज्येष्ठ नक्षत्र में रहेंगे चंद्रमा
आज चंद्रमा सुबह 11 बजकर 53 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे। इसके बाद ज्येष्ठ नक्षत्र शुरू होगा, जो अगले दिन तक रहेगा। ज्येष्ठ नक्षत्र वृश्चिक राशि के 16 डिग्री 40 मिनट से 30 डिग्री तक के क्षेत्र में स्थित माना जाता है।
ज्येष्ठ नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं, जबकि वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल देव माने जाते हैं। इस नक्षत्र के देवता इंद्र हैं, जिन्हें देवताओं का राजा कहा जाता है। इसका प्रतीक कुंडल, छाता या ताबीज माना गया है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ नक्षत्र में जन्मे लोगों में बुद्धिमत्ता, चतुराई, योजना बनाने की क्षमता, साहस और तार्किक सोच जैसे गुण देखे जाते हैं। ऐसे लोग स्वाभिमानी और लक्ष्य के प्रति दृढ़ हो सकते हैं, हालांकि उनका स्वभाव थोड़ा गुस्सैल भी माना जाता है और इनके मित्रों की संख्या सीमित हो सकती है।