आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में इन दिनों एक ही बात की रट लगी थी कि जिसका मॉडल जितना बड़ा होगा, वो टेक की दुनिया का उतना ही बड़ा सिकंदर बनेगा। OpenAI, Google और Anthropic जैसी अरबों डॉलर की ग्लोबल कंपनियां अपने एआई मॉडल्स को और भारी-भरकम बनाने की रेस में जुटी थीं।
लेकिन इसी बीच टोक्यो की एक चालाक एआई स्टार्टअप कंपनी ‘Sakana AI’ ने इस पूरी गेम को ही पलट दिया है। सकाना एआई ने अपना नया एआई सिस्टम “Sakana Fugu” “सकाना फुगु” लॉन्च कर दिया है और उनका दावा ऐसा-वैसा नहीं है। कंपनी का कहना है कि इसके ‘Fugu Ultra’ वेरिएंट ने कोडिंग, साइंटिफिक रीजनिंग और बेहद मुश्किल टास्क में टेक इंडस्ट्री के सबसे एडवांस मोनोलिथिक मॉडल्स जैसे ChatGPT-5.5, Gemini 3.1 Pro और Claude Opus 4.8 को सीधे मुकाबले में पछाड़ दिया है।
कैसे काम करता है ‘जापानी फुगु’?
इस ‘जापानी फुगु’ की सबसे खास बात यह है कि यह कोई अकेला खिलाड़ी नहीं है, बल्कि इसे आप एआई की दुनिया का ‘कैप्टन या स्मार्ट मैनेजर’ कह सकते हैं। आमतौर पर टेक कंपनियां एक ही बहुत बड़ा मॉडल बनाती हैं और उसे सब कुछ सिखाने की कोशिश करती हैं, लेकिन फुगु ने बिल्कुल अलग और स्मार्ट रास्ता चुना। यह खुद में कोई विशालकाय मॉडल नहीं है, बल्कि सिर्फ 7 अरब पैरामीटर्स का एक बेहद चालाक ‘एआई आर्केस्ट्रेटर’ या कंट्रोलर है।

जब आप फुगु को कोई बेहद पेचीदा काम सौंपते हैं, तो यह खुद अकेले जवाब ढूंढने के बजाय तुरंत दुनिया के सबसे बेस्ट उपलब्ध एआई मॉडल्स की एक ‘ड्रीम टीम’ तैयार कर देता है।
यह खुद बैकएंड पर तय करता है कि प्लानिंग कौन सा एआई मॉडल करेगा, कोडिंग का जिम्मा किसे सौंपना है, और लिखे गए कोड को री-चेक कौन सा मॉडल करेगा।
लास्ट में इन सभी एक्सपर्ट्स के नतीजों को मिलाकर यह यूजर को एक परफेक्ट और सटीक जवाब डिलीवर कर देता है। डेवलपर के लिए यह सारा तमाशा बैकएंड पर एक ही स्क्रीन के पीछे छिपकर होता है।
सिलिकॉन वैली की नींद उड़ाने वाले बेंचमार्क आंकड़े
कंपनी ने जो बेंचमार्क डेटा जारी किया है, वह वाकई सिलिकॉन वैली की नींद उड़ाने वाला है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कोडिंग के सबसे कठिन माने जाने वाले टेस्ट ‘SWE-Bench Pro’ पर Fugu Ultra ने 73.7 अंक हासिल किए। SWE-Bench Pro’ पर Fugu Ultra ने 73.7 अंक हासिल किए, जो कि Claude Opus के 69.2, ChatGPT-5.5 के 58.6 और Gemini 3.1 Pro के 54.2 स्कोर से काफी आगे है।

सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि 14 घंटे लगातार चलने वाले ऑटोमेटेड एआई रिसर्च, मैकेनिकल कैड डिजाइनिंग, बिना देखे शतरंज खेलने, रुबिक्स क्यूब सॉल्व करने और फाइनेंशियल प्रेडिक्शन जैसे माइंड-बेंडिंग प्रोजेक्ट्स में भी फुगु ने इन सिंगल मॉडल्स के मुकाबले बाजी मार ली।
दो अलग-अलग वेरिएंट्स में उपलब्ध
सकाना एआई ने इसे दो अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से पेश किया है:
Fugu: यह रोजमर्रा के सामान्य कामों, क्विक कोडिंग रिव्यूज और चैटबॉट्स के लिए है, जहाँ कम समय में रिस्पॉन्स चाहिए होता है।

Fugu Ultra: इसे जटिल रिसर्च और साइबर सिक्योरिटी एनालिसिस जैसे बेहद कठिन मल्टी-स्टेप टास्क को हैंडल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
रेस्ट्रिक्शन्स और बैन का परमानेंट इलाज
इस तकनीक का सबसे क्रांतिकारी पहलू इसका “स्वैपेबल पूल” आर्किटेक्चर है, जो इसे आज के दौर में भू-राजनीति और बैन का सबसे परफेक्ट तोड़ बनाता है। आजकल अमेरिकी रेस्ट्रिक्शन्स और एक्सपोर्ट कंट्रोल के कारण कई देशों में टॉप-टियर अमेरिकी एआई सर्विसेस के अचानक ब्लॉक होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

फुगु का सिस्टम इस समस्या का परमानेंट इलाज है। अगर भविष्य में कोई एक एआई प्रोवाइडर जैसे OpenAI या Anthropic अपनी सर्विस किसी देश या कंपनी के लिए बंद भी कर देता है, तो फुगु का स्मार्ट बैकएंड बिना यूजर को भनक लगे तुरंत ट्रैफिक को दूसरे चालू एआई मॉडल या ओपन-सोर्स मॉडल्स पर शिफ्ट कर देगा। इससे कंपनियों का किसी एक वेंडर पर निर्भर रहने का जोखिम हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
भले ही यह तकनीक गेम-चेंजर दिख रही हो, लेकिन टेक एक्सपर्ट्स के मन में इसके कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर कुछ जायज सवाल भी हैं: चूंकि यह बैकएंड पर एक साथ कई अलग-अलग मॉडल्स को काम पर लगाता है, इसलिए बहुत लंबे और उलझे हुए सवालों के मामलों में इसकी प्रोसेसिंग कॉस्ट और समय काफी बढ़ सकता है।

साथ ही, यह बैकएंड पर किस अनुपात में पेड और फ्री ओपन-सोर्स मॉडल्स का कॉम्बिनेशन बना रहा है, इसकी पूरी डिटेल आना अभी बाकी है। कुल मिलाकर Sakana Fugu ने यह साबित कर दिया है कि एआई की रेस में अब सिर्फ साइज मायने नहीं रखता, बल्कि स्मार्ट मैनेजमेंट सबसे बड़ा हथियार है। यह एआई की दुनिया में एक नए ‘कोलैबोरेशन एरा’ की शुरुआत है।