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NEET पेपर लीक विवाद पर राहुल गांधी ने मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा! कहा- ‘युवाओं को दहशतगर्द कहना बंद करे सरकार’

देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर बड़े सियासी संग्राम में तब्दील हो चुका है। NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तलवारें खिंच गई हैं। ताज़ा घटनाक्रम में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए न्याय मांग रहे छात्रों को ‘देश विरोधी’ और ‘दहशतगर्द’ करार दे रही है।

विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?


यह पूरा सियासी घमासान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक हालिया बयान के बाद शुरू हुआ। दरअसल, एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पेपर लीक के खिलाफ हो रहे छात्र प्रदर्शनों और उनके इस्तीफे की मांग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर तीखा पलटवार किया।

शिक्षा मंत्री ने विरोध प्रदर्शन करने वालों को “देश तोड़ने वाले तत्वों की बी-टीम” कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल चुनाव में जनता द्वारा खारिज कर दिए गए हैं, वे अब छात्रों के भेस में व्यवस्था को निशाना बना रहे हैं और देश विरोधी ताकतों के एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं।

राहुल गांधी का तीखा पलटवार


धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के बयान को देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों का सीधा अपमान बताया।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार अब हक़ और निष्पक्ष परीक्षा की मांग करने वाले छात्रों को ही ‘आतंकवादी’ और ‘दहशतगर्द’ बुला रही है। जिस मंत्री की नाकामी की वजह से लगातार पेपर लीक हुए, करोड़ों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा और कई छात्रों को मानसिक तनाव से गुज़रना पड़ा, वे अब पीड़ितों पर ही आरोप लगा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार का पुराना पैटर्न है, जब किसानों ने अपने हक़ की मांग की तो उन्हें ‘आंदोलनजीवी’ कहा गया, जब नागरिक सवाल उठाते हैं तो उन्हें ‘देश विरोधी’ कहा जाता है, और अब रोज़गार व पारदर्शी व्यवस्था की मांग करने वाले युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने मांग की है कि शिक्षा मंत्री को तुरंत देश के युवाओं से माफ़ी मांगनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

NEET परीक्षा में पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप। विपक्ष की मांग है की शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा और प्रभावित छात्रों को न्याय। प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक साजिश और देश विरोधी तत्वों का हाथ होने का दावा। देश भर के लाखों छात्र और अभिभावक इस समय असमंजस और मानसिक तनाव की स्थिति में हैं।

आगे की राह और असर


NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में गड़बड़ी का यह मामला अब केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दों में से एक बन चुका है। एक तरफ जहां छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी बात रख रहे हैं, वहीं संसद से लेकर सोशल मीडिया तक विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करती है या फिर इस गतिरोध को सुलझाने के लिए छात्रों के बीच कोई नया भरोसा जगा पाती है।

news desk

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