नई दिल्ली: सावन के मौसम में बढ़ी नमी, तापमान में बदलाव और खान-पान में गड़बड़ी के कारण कई लोगों को अपच, गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी परेशानियां होने लगती हैं। ऐसे में आयुर्वेद और पारंपरिक आहार में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है, जो पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद कर सकती हैं। करी पत्ता भी इन्हीं में से एक है।
योग गुरु, लेखिका, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉ. हंसा योगेंद्र के अनुसार, सावन में सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में करी पत्ते का सेवन किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, करी पत्ते को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे संतुलित आहार का हिस्सा ही समझना चाहिए।
करी पत्ते में विटामिन ए, बी समूह, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, फाइबर और कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। इसमें मौजूद महानिम्बाइन, गैलिक एसिड और क्वेरसेटिन जैसे यौगिक शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं।
कुछ शोधों में करी पत्ते में मौजूद जैव सक्रिय यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट गुणों का उल्लेख किया गया है। इसी वजह से संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा क्षमता को सहारा देने वाला माना जाता है।
सावन में पाचन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने पर करी पत्ता आहार में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर मल त्याग को नियमित रखने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है।
करी पत्ते में पॉलीफेनॉल, फ्लेवोनॉयड्स और कार्बाजोल एल्कलॉयड्स जैसे यौगिक भी पाए जाते हैं। इनके एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों पर शोध हुआ है। फाइबर आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
करी पत्ते में मौजूद फाइबर भोजन के बाद ग्लूकोज के अवशोषण की गति को प्रभावित कर सकता है, जिससे रक्त शर्करा में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
कुछ पशु अध्ययनों में करी पत्ते के अर्क से रक्त शर्करा में कमी और मधुमेहरोधी प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि, इन नतीजों को इंसानों में मधुमेह के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मधुमेह की दवा लेने वाले लोगों को अपने उपचार की जगह करी पत्ते पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
करी पत्ते पर हुए कुछ अध्ययनों में इसके अर्क का कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर पर संभावित सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए सिर्फ करी पत्ते का सेवन पर्याप्त नहीं है। इसके साथ संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
करी पत्ते में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों पर मस्तिष्क के स्वास्थ्य को लेकर भी शोध किया गया है। कुछ अध्ययनों में इनके संभावित न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव सामने आए हैं।
करी पत्ते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मस्तिष्क को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, याददाश्त बढ़ाने या अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचाने के दावे को लेकर अभी इंसानों में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
करी पत्ते को आप दाल, सांभर, सब्जी, चटनी और दूसरी डिश में आसानी से शामिल कर सकते हैं। अगर इसे सुबह खाली पेट लेने की बात कही जा रही है, तो मात्रा सीमित रखना जरूरी है। किसी बीमारी, दवा या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में इसे नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
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