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सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा खास संयोग! जानें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, पूजा की पूरी विधि और 108 बार जपने वाला मंत्र

नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है और सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्तों के लिए खास महत्व रहता है। इस बार सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन आर्द्रा नक्षत्र के साथ वज्र और सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार पर श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।

मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत करने और विधि-विधान से भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आने की भी मान्यता है। अविवाहित लोगों के लिए मनचाहा जीवनसाथी मिलने और विवाहित लोगों के दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना से भी यह व्रत किया जाता है।

सावन सोमवार पर पूजा और जलाभिषेक का शुभ समय

10 अगस्त को सावन सोमवार की पूजा के लिए दो प्रमुख शुभ समय बताए गए हैं। सुबह 5:47 बजे से 7:27 बजे तक और सुबह 9:07 बजे से 10:47 बजे तक पूजा की जा सकती है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए रात 7:05 बजे से 9:14 बजे तक का समय बताया गया है। अमृत चौघड़िया सुबह 5:47 बजे से 7:27 बजे तक और शाम 5:25 बजे से 7:05 बजे तक रहेगा। वहीं शुभ चौघड़िया सुबह 9:07 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा।

सावन सोमवार पर ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सावन सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर या शिव मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल चढ़ाकर करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, आक के फूल, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं।

इसके बाद भगवान शिव के मंत्र का जाप करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

शिव चालीसा और आरती से करें पूजा का समापन

अभिषेक और मंत्र जाप के बाद शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव पुराण का पाठ किया जा सकता है। पूजा के अंत में कपूर या घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं। सामान्य रूप से दिनभर सात्विक भोजन करने की परंपरा भी है। शाम के समय दोबारा भगवान शिव की पूजा करें, प्रसाद अर्पित करें और जरूरतमंद लोगों को दान करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार पर शिव आराधना के दौरान श्रद्धा, संयम और सात्विक आचरण का विशेष महत्व माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पूजा के नियम और मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

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