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किसी भी वक्त पिघल सकता है अंटार्कटिका का ‘डूम्सडे ग्लेशियर’. अमेरिका के सबसे बड़े शहर के डूबने का बढ़ा खतरा!

अंटार्कटिका में स्थित थ्वेट्स ग्लेशियर, जिसे दुनिया भर में ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ के नाम से जाना जाता है, तेजी से ढहने की स्थिति में पहुंचता जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विशाल हिम-पट्टी के टूटने का असर पूरी मानव सभ्यता पर पड़ सकता है. यहां तक कि यह न्यूयॉर्क जैसे बड़े तटीय शहरों को भी डूबो सकता है.

पिघलने की रफ्तार बढ़ने की नई वजह खोजी गई

नई शोध में पता चला है कि ग्लेशियर की सतह के नीचे पानी की परत में तूफ़ान जैसे तेज़ भंवर (vortex) बन रहे हैं. ये शक्तिशाली भंवर गर्म समुद्री धाराओं को अपनी ओर खींच रहे हैं. इससे ग्लेशियर के नीचे से बर्फ तेजी से पिघल रही है और ऊपर की बर्फ में लगातार नई दरारें बन रही हैं।

यह प्रक्रिया एक विनाशकारी चक्र (vicious cycle) बना रही है—
जहाँ पिघलती बर्फ पानी में और उथल-पुथल पैदा करती है, और यह उथल-पुथल बर्फ को और अधिक नुकसान पहुँचाती है।

1980 के दशक से अब तक 600 अरब टन बर्फ गायब

Nature Geoscience जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि थ्वेट्स ग्लेशियर अब तक 600 अरब टन से ज्यादा बर्फ खो चुका है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, इरविन की ग्लेशियोलॉजिस्ट मैटिया पोइनली के अनुसार “आने वाले समय में समुद्र का तापमान और बढ़ेगा। जहां-जहां ज्यादा गर्म पानी होगा, वहां ऐसे भंवर और तेज़ी से ग्लेशियरों को कमजोर करेंगे। यह प्रक्रिया अंटार्कटिका के कई हिस्सों में दोहराई जा सकती है.”

उन्होंने इन भंवरों को “बिल्कुल समुद्री तूफ़ान जैसा” बताते हुए कहा कि इनके कारण पानी की ऊपर–नीचे की तेज़ और खतरनाक हलचल ग्लेशियर को भीतर से कमजोर कर रही है.

थ्वेट्स ग्लेशियर पूरा ब्रिटेन जितना बड़ा

थ्वेट्स ग्लेशियर पश्चिम अंटार्कटिक आइस शीट में स्थित है, जिसकी चौड़ाई लगभग 75 मील और कुल क्षेत्रफल 74,000 वर्ग मील है. यानी यह लगभग ब्रिटेन या फ्लोरिडा जितना बड़ा है.

इसी के तेजी से कमजोर होने और संभावित ढहने के कारण वैज्ञानिक इसे “डूम्सडे ग्लेशियर” कहते हैं, क्योंकि इसके टूटने से वैश्विक समुद्र-स्तर में भारी वृद्धि हो सकती है और दुनिया के कई तटीय क्षेत्रों को भारी खतरा हो सकता है.

news desk

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