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मुर्गियों ने क्यों घटा दिया अंडा देना? भीषण गर्मी और जहरीली धुंध से पोल्ट्री पर दोहरी मार, बढ़ी किसानों की चिंता

कुआलालंपुर: मलेशिया में अंडों के उत्पादन में लगातार गिरावट ने पोल्ट्री कारोबार से जुड़े किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के साथ पड़ोसी इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग से उठ रहा धुआं भी मलेशिया पहुंच रहा है। इससे धुंध की स्थिति बनी हुई है और हवा में प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ी है। गर्मी और खराब हवा के इस दोहरे असर से मुर्गियां कम खाना खा रही हैं, जिसका सीधा असर उनकी अंडा देने की क्षमता पर पड़ रहा है।

मलेशिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बड़ी मात्रा में अंडों का उत्पादन होता है। लेकिन हाल के समय में उत्पादन में कमी और पोल्ट्री पक्षियों की बढ़ती मौत ने किसानों के साथ सरकार और प्रशासन की भी चिंता बढ़ाई है। इस स्थिति के पीछे भीषण गर्मी और इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग से बनी धुंध को अहम कारण बताया जा रहा है।

धुंध और गर्मी की दोहरी मार

मलेशिया और इंडोनेशिया में इस साल गर्मी के साथ अगस्त से इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं भी मलेशिया पहुंच रहा है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 कणों और अत्यधिक तापमान का असर पोल्ट्री पक्षियों पर पड़ा है।

मलेशियाई पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रमुख जैफुल जकारिया के मुताबिक, छोटे और पारंपरिक नस्ल पालने वाले किसानों ने बड़ी संख्या में मुर्गियों के नुकसान की जानकारी दी है। खुले दड़बों में हवा का पर्याप्त प्रवाह नहीं होने और धुएं के कारण पक्षियों को सांस लेने के साथ शरीर का तापमान नियंत्रित करने में परेशानी हो रही है।

मुर्गियों में बढ़ा ‘हीट स्ट्रेस’, कम हुआ खाना

अत्यधिक तापमान और वायु प्रदूषण बढ़ने पर मुर्गियां सामान्य से कम खाना शुरू कर देती हैं। भोजन कम होने से उनके शरीर को अंडा बनाने के लिए जरूरी ऊर्जा और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। इससे अंडा उत्पादन प्रभावित होता है।

इसके साथ ही तनाव से जुड़े कॉर्टिकोस्टेरॉन हार्मोन का स्तर बढ़ने की बात भी सामने आई है। इसका असर मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और अंडा देने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

रिसर्च में भी सामने आया प्रदूषण का असर

मुर्गियों पर पीएम 2.5 के प्रभाव को लेकर रिसर्च भी हुई है। चांग माई राजभट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक स्टडी के मुताबिक, अगर मुर्गियों को 150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पीएम 2.5 के स्तर में तीन दिनों तक रखा जाए, तो उनके दैनिक वजन में 5.2 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।

खराब हवा और गर्मी का असर केवल अंडों की संख्या तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। सांस लेने में परेशानी के कारण मुर्गियां कमजोर हो सकती हैं और अंडे के छिलके की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। अत्यधिक गर्मी और धुंध से अंडों के आकार और संख्या में कमी के साथ मुर्गियों की मृत्यु दर बढ़ने की भी बात सामने आई है।

ब्रॉयलर मुर्गियों पर भी दिखा असर

इस मौसम का असर सिर्फ अंडा उत्पादन पर नहीं पड़ा है। मांस के लिए पाली जाने वाली ब्रॉयलर मुर्गियों पर भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है। उन्हें अपने तय वजन तक पहुंचने में सामान्य से करीब एक सप्ताह अधिक समय लग रहा है।

इस संकट की सबसे ज्यादा मार खुले दड़बों वाले छोटे किसानों पर पड़ी है। इसके मुकाबले आधुनिक तापमान-नियंत्रित पोल्ट्री फार्म गर्मी और धुंध की स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल पा रहे हैं।

किसानों की लागत भी बढ़ी

मुर्गियों को गर्मी और धुंध से बचाने के लिए पोल्ट्री किसानों को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं। फार्म को ठंडा रखने के लिए कूलिंग पैड, बड़े पंखे, जनरेटर और पानी के छिड़काव की व्यवस्था लगातार चलानी पड़ रही है। इससे बिजली और रखरखाव का खर्च बढ़ गया है।

कुछ फार्मों में दोपहर के समय तापमान नियंत्रित करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त संसाधनों का यह खर्च उत्पादन लागत पर सीधा दबाव डाल रहा है।

कम सप्लाई से अंडों के दाम पर दबाव

अंडों के उत्पादन में कमी का असर बाजार पर भी दिखने लगा है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से स्थानीय बाजारों में अंडों की कीमतें बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ समय तक गर्मी या धुंध रहने से पूरे देश में तुरंत अंडों की भारी कमी नहीं होगी।

लेकिन अगर धुंध और अत्यधिक तापमान लंबे समय तक बना रहता है, तो दक्षिण-पूर्व एशिया में अंडों की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में बाजार में अंडों की कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है।

मलेशिया सरकार को भी अत्यधिक गर्म मौसम के कारण मुर्गियों की मृत्यु दर बढ़ने और अंडा उत्पादन घटने की रिपोर्ट मिली है। मांग में बड़ा बदलाव नहीं होने और आपूर्ति कम होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

पोल्ट्री फार्मों में क्या किए जा रहे उपाय

किसान दड़बों में वेंटिलेशन पंखे लगा रहे हैं और हवा का प्रवाह बेहतर करने के लिए निर्माण में बदलाव कर रहे हैं। विशेषज्ञ लगातार साफ और ठंडे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की सलाह दे रहे हैं।

हालांकि वेंटिलेशन, पानी और तापमान नियंत्रित करने के इन इंतजामों ने छोटे किसानों की उत्पादन लागत बढ़ा दी है। ऐसे में मौसम की मार का असर सिर्फ मुर्गियों और अंडों के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा दबाव पोल्ट्री कारोबार की लागत और बाजार की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।

vineet verma

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