क्या भारत एक बार फिर सूखे की ओर बढ़ रहा है? NASA की ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी और बन रहे संभावित “Godzilla El Niño” के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह एल नीनो और मजबूत हुआ तो भारत के मानसून पर असर पड़ सकता है, जिससे बारिश कम होने और सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
आखिर NASA ने अपनी तस्वीरों में ऐसा क्या देखा है और इसका भारत पर कितना असर पड़ सकता है, आइए समझते हैं।
Godzilla El Niño क्या है?
“Godzilla El Niño” कोई आधिकारिक वैज्ञानिक नाम नहीं है। यह शब्द 1997-98 और 2015-16 जैसे बेहद शक्तिशाली El Niño घटनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया था। जब प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाता है और उसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ने लगता है, तब इसे अनौपचारिक रूप से Godzilla El Niño कहा जाता है !
NASA ने क्या देखा?
NASA के Sentinel-6 सैटेलाइट ने समुद्र की सतह की ऊंचाई और गर्म पानी के विशाल भंडार को रिकॉर्ड किया है। समुद्र का पानी गर्म होने पर फैलता है, इसलिए समुद्र की सतह ऊंची दिखने लगती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकेत है कि समुद्र के अंदर बड़ी मात्रा में गर्मी जमा हो रही है और El Niño मजबूत हो सकता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत की लगभग आधी से ज्यादा खेती आज भी मानसून की बारिश पर निर्भर है। ऐसे में अगर एल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है और सामान्य से कम बारिश होती है, तो इसका सीधा असर फसलों, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है। कम बारिश की स्थिति में सूखे का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ संभावित “गॉडजिला एल नीनो” पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या सच में सूखे का खतरा है?
फिलहाल वैज्ञानिकों ने किसी निश्चित सूखे की घोषणा नहीं की है, लेकिन बढ़ती समुद्री गर्मी और संभावित मजबूत एल नीनो ने चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एल नीनो आने वाले महीनों में और शक्तिशाली होता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि, मानसून केवल एल नीनो से तय नहीं होता। हिंद महासागर की परिस्थितियां, स्थानीय मौसम प्रणालियां और अन्य वैश्विक कारक भी इसकी दिशा और तीव्रता को प्रभावित करते हैं। इसलिए अभी सूखे की आशंका तो है, लेकिन स्थिति पर नजर बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।
1997 के Godzilla El Niño की प्रमुख बातें
- 1997-98 का एल नीनो आधुनिक इतिहास के सबसे शक्तिशाली एल नीनो में से एक माना जाता है, इसलिए इसे बाद में “गॉडजिला एल नीनो” का नाम दिया गया।
- प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया था।
- इस घटना ने दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित किया। कई देशों में भीषण बाढ़ आई, जबकि कुछ क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हुई।
- इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लगी, जिससे लाखों लोगों पर असर पड़ा।
- पेरू और इक्वाडोर जैसे देशों में भारी बारिश और बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई।
- 1998 उस समय तक पृथ्वी के सबसे गर्म वर्षों में से एक बन गया था, जिसमें एल नीनो की बड़ी भूमिका मानी गई।
- भारत में भी मानसून पर इसका असर देखने को मिला और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई।
- वैज्ञानिक आज भी 1997-98 के एल नीनो को एक “बेंचमार्क” घटना मानते हैं, जिसकी तुलना नए शक्तिशाली एल नीनो से की जाती है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
अगर संभावित “गॉडजिला एल नीनो” विकसित होता है, तो इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा। एल नीनो वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल देता है, जिससे कुछ देशों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि कई क्षेत्रों में सूखा और जल संकट गहरा सकता है। इसके अलावा हीटवेव, जंगलों में आग और रिकॉर्ड तापमान जैसी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि NASA समेत दुनिया की प्रमुख मौसम एजेंसियां प्रशांत महासागर में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर रख रही हैं।