नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र 2026 के अब केवल दो सप्ताह (10 बैठकें) शेष बचे हैं, लेकिन संसद के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक इस सत्र में लाएगी?
एक तरफ जहां विपक्ष के हंगामे और संख्याबल के गणित ने सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है, वहीं सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। अप्रैल के विशेष सत्र में बिल गिरने से हुई किरकिरी के बाद सत्ता पक्ष इस बार कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है और पूरी रणनीति ‘वेट एंड वॉच’ (देखें और इंतज़ार करें) पर टिकी हुई है।
छात्रों के प्रदर्शन और विपक्ष के हंगामे ने बिगाड़ा गणित
सत्र की शुरुआत से पहले विपक्षी खेमे में हुई हलचल से लग रहा था कि सरकार आसानी से दो-तिहाई बहुमत जुटा लेगी। लेकिन NEET और पब्लिक परीक्षाओं के पेपर लीक मामले पर छात्रों के उग्र प्रदर्शनों ने पूरा खेल बदल दिया।
- सहयोगियों के बदले सुर: DMK और NCP (शरद पवार) जैसे दल, जिनके करीब 30 सांसदों के समर्थन से सरकार 2/3 बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सकती थी, अब सरकार के खिलाफ मुखर हैं।
- मुद्दों की भरमार: विपक्ष शिक्षा मंत्री के बाद अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर हमलावर है। कांग्रेस और सपा की रणनीति सदन में लगातार हंगामा बनाए रखने की है, ताकि बिल पर चर्चा का माहौल ही न बन सके।
कांग्रेस को 2029 के चुनाव की चिंता
कांग्रेस और विपक्षी दलों को अंदेशा है कि परिसीमन का इस्तेमाल सत्तारूढ़ दल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकता है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि जिस तरह जम्मू-कश्मीर और असम में निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन हुआ, उसी तरह महिला आरक्षण के बहाने पूरे देश में सीटों के समीकरण बदलने की योजना है।
12 साल बाद बिल गिरने का सबक: सरकार क्यों है सतर्क?
अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में 12 साल में पहली बार सरकार का कोई महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने से रह गया था। सूत्रों का कहना है कि:
- पक्का गणित जरूरी: जब तक दो-तिहाई बहुमत की 100% गारंटी नहीं होगी, तब तक सरकार यह संविधान संशोधन विधेयक सदन में नहीं पेश करेगी।
- पीएम-गृह मंत्री की बैठक: शुक्रवार को कैबिनेट बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच 15 मिनट की विशेष वार्ता हुई, जिसमें अगले राजनीतिक कदमों की समीक्षा की गई।
क्या समय सीमा खत्म हो रही है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार को 2029 के लोकसभा चुनाव में 33% महिला आरक्षण लागू करना है, तो परिसीमन की लंबी वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को देखते हुए इस बिल का जल्द पारित होना बेहद जरूरी है।
आगामी सप्ताह में सरकार FCRA संशोधन बिल लाने जा रही है, जिस पर तीखी बहस तय है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार परिसीमन बिल का दांव इसी सत्र में खेलती है या इसे आगे के लिए टालती है।