CWC मीटिंग में मनरेगा बचाओ अभियान का फैसला
नई दिल्ली के इंदिरा भवन में आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ और प्रमुख नेता शामिल हुए। इस बैठक में मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर चिंता जताई गई और सर्वसम्मति से इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया।
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि CWC की बैठक में यह शपथ ली गई है कि मनरेगा को प्रमुख मुद्दा बनाकर पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस 5 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ की शुरुआत करेगी।
खड़गे ने साफ शब्दों में कहा कि मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि भारतीय संविधान से मिला काम का अधिकार है। कांग्रेस इसे हर हाल में बचाने के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी ने संकल्प लिया है कि ग्रामीण मज़दूरों के सम्मान, रोज़गार, मज़दूरी और समय पर भुगतान के अधिकार के लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाएगी। साथ ही मांग-आधारित रोज़गार व्यवस्था और ग्राम सभा के अधिकारों की भी पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
कांग्रेस ने यह भी शपथ ली कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और मज़दूरों के अधिकारों को ख़ैरात में बदलने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
इस मौके पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक वर्क प्रोग्राम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा विकास मॉडल है जिसकी सराहना पूरी दुनिया में होती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बिना कैबिनेट से चर्चा किए और बिना किसी गंभीर अध्ययन के इस योजना को कमजोर कर रहे हैं।
राहुल ने कहा कि यह राज्यों पर सीधा हमला है, क्योंकि राज्यों के पैसे और निर्णय लेने के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के जरिए गांवों में बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ और मज़दूरों के लिए एक न्यूनतम सुरक्षा कवच बना, जिसे अब खत्म किया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान आदिवासियों, दलितों, ओबीसी, गरीब सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यकों को होगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद गरीबों से पैसा छीनकर बड़े उद्योगपतियों, खासकर अडानी जैसे लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक ढांचे और पंचायती राज व्यवस्था पर भी हमला बताया और कहा कि कांग्रेस इसका डटकर विरोध करेगी।
बैठक के अंत में कांग्रेस ने संविधान और लोकतंत्र में पूरी आस्था जताते हुए यह संकल्प दोहराया कि मनरेगा, मज़दूरों के अधिकार और गांव-गांव तक अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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