सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड
आज के सोशल-मीडिया के दौर में ब्यूटी ट्रेंड्स रोज़ बदलते हैं, कभी कॉफी स्क्रब वायरल होता है तो कभी घर की रसोई से निकले DIY फेस पैक। लेकिन इन दिनों इंटरनेट पर जो ट्रेंड सबसे ज़्यादा वायरल हो रहा है, उसने डर्मेटोलॉजिस्ट्स और हेल्थ-एक्सपर्ट्स तक को हैरान कर दिया है।
ट्रेंड का नाम है Menstrual Masking !
यानि पीरियड्स के खून को चेहरे पर लगाना। Instagram और कई रील प्लेटफॉर्म पर कुछ महिलाएँ दावा कर रही हैं कि मेन्स्ट्रुअल ब्लड को फेस मास्क की तरह इस्तेमाल करने से ‘नेचुरल ग्लो, ‘एक्ने ट्रीटमेंट’ और ‘एंटी एजिंग’ जैसे फायदे मिलते हैं।
क्या है Menstrual masking?
Menstrual masking में महिलाएँ अपने पीरियड के दौरान निकले blood को इकट्ठा करके चेहरों पर लगाने का दावा करती हैं। उनका तर्क है की period blood में stem cells, cytokines और growth factors होते हैं जो skin रीजनरेशन में मदद कर सकते हैं।
कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर्स इसे ‘natural, feminine energy therapy’ भी बता रही हैं। पर असलियत इससे बिल्कुल अलग है। ‘डर्मेटोलॉजिस्ट्स और हेल्थ एक्सपर्ट का साफ-साफ जवाब है की ये ट्रेंड बिलकुल सेफ नहीं है’
एक्सपर्ट्स का साफ जवाब
लगातार वायरल वीडियोज़ के बीच डर्मेटोलॉजिस्ट्स और कई ग्लोबल स्किन एक्सपर्ट्स ने इस ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई है। उनकी यूनेनिमस राय है कि ये अभ्यास न तो साइंटिफिकली प्रूवन है, न ही मेडिकली सेफ।
Dr. Amita Baiswar Singh(BAMS पंचकर्म स्पेशलिस्ट) इस वायरल ट्रेंड पर कहती है की, सोशल मीडिया पर Menstrual blood masking जो खूब वायरल वायरल हो रहा है वो बिलकुल भी सेफ नहीं है क्योंकि मेडिकल रिसर्च बताती है की इसका अभी तक न तो इसका आयुर्वेद में उल्लेख न ही ये साइंटिफिकली प्रूवन है। जो इसे PRP ट्रीटमेंट मान के यूज़ कर रहे है पर PRP (प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा) ट्रीटमेंट दूसरा होता है। PRP सेफ और साइंटिफिकली प्रूवन होता है, लेकिन ये मास्किंग उसका बिलकुल अपोजिट है, इसमें बहुत ज्यादा इम्प्योरिटीज होती है और ये अनेको स्किन इन्फेक्शन या अलेर्जी को बुलावा देने का काम करता है। बात अगर नेचुरल ग्लो की तो इस blood Masking से कोई प्रमाण नहीं है, आयुर्वेद में भी इसका कोई प्रमाण नही है, ये मास्किंग कही से भी आपके स्किन रिपेयर या स्किन ग्लो के लिए काम नहीं करता इससे बस कई इन्फेक्शन आपको हो सकते है।
मेंन्स्ट्रुअल ब्लड स्टरिल नहीं होता। इसमें बैक्टीरिया, फंगी और वैजाइनल सिक्रीशन्स शामिल होते हैं। इसे चेहरे पर लगाना इन्फेक्शन को सीधा निमंत्रण देना है।
मेन्स्ट्रुअल ब्लड सिर्फ खून नहीं होता। इसमें गर्भाशय की एंडोमेट्रियल लाइनिंग, सर्वाइकल/वैजाइनल फ्लूइड्स, टिश्यू फ्रैग्मेंट्स, और नॉर्मल वैजाइनल फ्लोरा शामिल होते हैं जो चेहरे की त्वचा के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं है।
अगर आपकी त्वचा पर पिंपल्स, ओपन पोर्स, कट्स या एक्टिव एक्ने है, तो यह कच्चा मेन्स्ट्रुअल फ्लूइड गंभीर इन्फेक्शन, फंगल ग्रोथ, रैशेस और सीवियर इरिटेशन पैदा कर सकता है।
‘स्टेम सेल्स’ वाला दावा
ये दावा कि पीरियड ब्लड में रीजनरेटिव प्रॉपर्टीज होती हैं, क्लिनिकल रिसर्च में आंशिक रूप से सही है, लेकिन यहाँ एक बड़ा अंतर है: स्टेम-सेल या ब्लड-बेस्ड थेरेपी हमेशा लैब-प्यूरीफाइड मटेरियल से की जाती है। यह सामग्री स्टरिल, प्रोसेस्ड और मेडिकली कंट्रोल्ड होती है (जैसे PRP थेरेपी)।
कोई क्लीनिकल प्रूफ नहीं
कच्चे मेन्स्ट्रुअल ब्लड का स्किन ट्रीटमेंट से कोई क्लीनिकल प्रूफ मौजूद नहीं है। डर्मेटोलॉजिस्ट्स का कहना है, “इंटरनेट रिसर्च और मेडिकल रिसर्च दो अलग चीज़ें हैं।
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