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अमेरिका से दूरी, भारत से दोस्ती कार्नी की भारत यात्रा क्यों कनाडा के लिए गेम-चेंजर मानी जा रही है ?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक होने जा रही है और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े “रीसेट” के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरे के दौरान भारत और कनाडा के बीच “विशाल” स्तर के समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। कार्नी अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जहां वे बड़े उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे नई दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम बातचीत करेंगे।

ऊर्जा से लेकर टेक्नोलॉजी तक, एजेंडा काफी बड़ा

भारत में कनाडा के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के मुताबिक, इस यात्रा का एजेंडा बेहद व्यापक है। परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, शिक्षा, रिसर्च और संस्कृति जैसे कई अहम क्षेत्रों में समझौते संभव हैं। सबसे अहम डील 10 साल की यूरेनियम सप्लाई से जुड़ी मानी जा रही है, जिसके तहत कनाडा भारत को करीब C$2.8 बिलियन का यूरेनियम देगा। इससे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा सेक्टर में भी हलचल तेज हो सकती है। भारत कनाडा से हैवी क्रूड ऑयल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ा सकता है, वहीं पाइपलाइन और टर्मिनल्स में निवेश पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और प्रोसेसिंग में सहयोग की योजना है, जो आने वाले समय में ग्रीन और टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

व्यापारिक रिश्तों का ‘रीसेट’ और आगे की रणनीति

टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर भी दोनों देश AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और रिसर्च में मिलकर काम करना चाहते हैं। साथ ही व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत को रफ्तार देने पर जोर रहेगा। लक्ष्य है कि 2030 तक भारत-कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 30–31 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 70 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए।

यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब पिछले कुछ वर्षों में भारत-कनाडा संबंधों में तनाव देखने को मिला था। पूर्व प्रधानमंत्री ट्रूडो के दौर में खालिस्तानी मुद्दों और आरोप-प्रत्यारोप से रिश्ते बिगड़े थे, लेकिन कार्नी सरकार अब रिश्तों को साफ तौर पर “ट्रेड और बिजनेस फोकस” के साथ आगे बढ़ाना चाहती है। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात G7 Summit के दौरान हुई थी, जहां CEPA की बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमति बनी थी।

कुल मिलाकर, मार्क कार्नी की यह भारत यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नहीं, बल्कि कनाडा की उस रणनीति का भी अहम हिस्सा है, जिसके तहत वह अमेरिका पर निर्भरता कम कर भारत जैसे उभरते वैश्विक साझेदारों के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है। वहीं भारत के लिए भी यह दौरा उसकी वैश्विक व्यापार और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

news desk

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