करिबा: जिम्बाब्वे की करिबा झील में मंगलवार को एक बड़ा नाव हादसा हो गया। यात्रियों को लेकर जा रही नाव तेज लहरों की चपेट में आकर पलट गई। हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नाव में उसकी तय क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे। राहत और बचाव अभियान के दौरान 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
90 यात्रियों की क्षमता, सवार थे 114 से ज्यादा लोग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाव पर 90 यात्रियों के बैठने की क्षमता थी, लेकिन हादसे के समय उसमें कम से कम 114 वयस्क और पांच क्रू सदस्य सवार थे। बताया जा रहा है कि नाव करिबा शहर से झील में मौजूद कई द्वीपों और मछली पकड़ने वाले शिविरों के बीच लोगों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होती थी।
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि नाव खराब मौसम के बीच रवाना हुई थी। झील में अचानक तेज लहरें उठीं और नाव उनसे टकराकर असंतुलित हो गई। इसके बाद नाव के पलटने की बात सामने आई है।
खराब मौसम में भी रवाना हुई नाव, इंजन बंद होने की आशंका
पुलिस और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त मौसम खराब था। इसके बावजूद नाव अपनी यात्रा पर निकल गई थी। आशंका जताई जा रही है कि तेज लहरों की चपेट में आने के बाद नाव का इंजन बंद हो गया होगा, जिसके चलते स्थिति और बिगड़ गई।
अधिकारियों के मुताबिक, बचाव दल ने अब तक 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। हालांकि, 20 से ज्यादा यात्रियों के लापता होने की जानकारी के बाद तलाशी अभियान जारी है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है।
जिम्बाब्वे-जाम्बिया सीमा पर स्थित है करिबा झील
करिबा झील जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित है। यह जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे से 300 किलोमीटर से अधिक उत्तर-पूर्व में है। क्षेत्रफल के लिहाज से करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैली यह दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में शामिल है।
यह झील जाम्बेजी नदी पर करिबा बांध के निर्माण के बाद अस्तित्व में आई थी। बांध का निर्माण 1950 के दशक में शुरू हुआ था, जबकि झील को भरने की प्रक्रिया 1960 के दशक की शुरुआत में पूरी हुई थी। करिबा झील आज भी क्षेत्र में परिवहन, मछली पकड़ने और पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान जारी
नाव के पलटने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। लापता लोगों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेज लहरों और खराब मौसम के बीच झील में फंसे लोगों तक पहुंचना है। हादसे की विस्तृत जांच भी की जा रही है, जिसमें नाव पर क्षमता से अधिक यात्रियों को सवार किए जाने और खराब मौसम में उसे रवाना करने जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी।