लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (Aliganj) थाना क्षेत्र के पुरनिया इलाके से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। सोमवार को यहाँ एक दुकान में लगी भीषण आग (Massive Fire) ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और ऊपर चल रहे एक कोचिंग सेंटर को अपनी चपेट में ले लिया।
इस भयावह घटना में इमारत के भीतर धुएं का गुबार फैलने से कई छात्र-छात्राएं फंस गए। अपनी जान बचाने के लिए बच्चे छतों और छज्जों से नीचे कूदने को मजबूर हो गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में इस हादसे में दस से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जिनके शव मलबे से निकाले गए हैं।
स्पॉट पर पहुंचे डिप्टी सीएम और आला अधिकारी, रेस्क्यू तेज
हादसे की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak), डीजी फायर (DG Fire) और लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) विशाख जी अय्यर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। प्रशासन और फायर ब्रिगेड की कई टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) में जुटी हुई हैं। हाइड्रोलिक सीढ़ियों की मदद से फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान, जताया गहरा दुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने लखनऊ हादसे का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं:
- सर्वश्रेष्ठ इलाज: अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल छात्रों को तत्काल और बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए।
- कड़ी निगरानी: जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को मौके पर रहकर ही राहत कार्यों की लाइव मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया गया है।
जब जान बचाने के लिए छतों से कूदने लगे छात्र
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुरनिया इलाके की इस दुकान में आग इतनी तेजी से भड़की कि ऊपर मौजूद कोचिंग सेंटर के छात्रों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पूरी बिल्डिंग जहरीले काले धुएं से घिर गई।
चीख-पुकार और भगदड़: दम घुटने और आग की लपटों से घिरे बच्चे अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और छतों से नीचे कूदने लगे। स्थानीय लोगों ने अपनी जान पर खेलकर कई छात्र-छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन तब तक आग सब कुछ खाक कर चुकी थी।
रिहायशी और कमर्शियल मिक्स इलाकों में कितनी सुरक्षित हैं कोचिंग?
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहरों में चल रहे कोचिंग सेंटर्स के सेफ्टी ऑडिट (Safety Audit) पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
- नीचे कमर्शियल दुकानें और ऊपर कोचिंग सेंटर-क्या ऐसे संवेदनशील भवनों में फायर एग्जिट (Emergency Exit) की कोई व्यवस्था थी?
- आग लगने के असली कारणों (शॉर्ट सर्किट या अन्य वजह) की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम का गठन किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद लापरवाही बरतने वाले बिल्डिंग मालिकों और कोचिंग संचालकों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।