Trending News

लेह हिंसा की जांच शुरू, सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी से बढ़ा आक्रोश – LAB और KDA ने केंद्र से बातचीत छोड़ी

लद्दाख प्रशासन ने लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों की जांच शुरू कर दी है. एक हफ़्ते के कर्फ़्यू और हालात सामान्य होने के बाद यह कार्रवाई की गई है. इस घटना में पुलिस फ़ायरिंग से चार नागरिकों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे. नुब्रा के SDM मुकुल बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है और उनसे चार हफ्तों में रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है.

प्रशासन ने घोषणा की है कि 4 से 18 अक्टूबर के बीच जो भी घटना की जानकारी रखता हो, वह डिप्टी कमिश्नर ऑफिस, लेह के कॉन्फ्रेंस हॉल में बयान या सबूत (लिखित, मौखिक, फोटो या वीडियो) जमा कर सकता है.

सोशल मीडिया की भूमिका और सोनम वांगचुक पर कार्रवाई

पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पड़ताल कर रही हैं कि सोशल मीडिया ने आंदोलन को भड़काने में क्या भूमिका निभाई. सूत्रों के मुताबिक, 23 सितंबर की रात कई पुराने निष्क्रिय अकाउंट अचानक सक्रिय हुए और अपीलें जारी कीं, जिनसे विभिन्न इलाकों से लोग प्रदर्शन स्थल पर जुट गए.

घटना के दो दिन बाद पुलिस ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ़्तार कर लिया. उन पर विदेशी संपर्क और भीड़ को भड़काने के आरोप लगे हैं. पुलिस का दावा है कि उनके पुराने विरोध प्रदर्शनों के वीडियो पाकिस्तान की एक खुफिया एजेंसी से जुड़े व्यक्ति तक भेजे गए थे.

लद्दाख में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना सीधे ब्रिटिश शासन से करते हुए गृह मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए. गीतांजलि ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा – “क्या भारत सचमुच आज़ाद है?”

उन्होंने 1857 के विद्रोह का हवाला देते हुए कहा कि उस समय 24,000 अंग्रेज़ों ने महारानी के आदेश पर 3 करोड़ भारतीयों पर अत्याचार करने के लिए 1.35 लाख भारतीय सिपाहियों का इस्तेमाल किया था. आज, वही तस्वीर लद्दाख में दिखाई दे रही है. उनका आरोप है कि गृह मंत्रालय के आदेश पर एक दर्जन प्रशासक 2,400 लद्दाखी पुलिसकर्मियों का दुरुपयोग करके 3 लाख लद्दाखियों पर अत्याचार कर रहे हैं.

बढ़ता राजनीतिक टकराव, वार्ता से LAB और KDA का हटना

वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद पूरे लद्दाख में गुस्सा फैल गया. समर्थकों का कहना है कि उन्हें शांतिपूर्ण असहमति के कारण निशाना बनाया गया. उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने केंद्र की तुलना सीधे ब्रिटिश शासन से की और सवाल उठाया कि “क्या भारत सचमुच आज़ाद है?”

इधर, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने केंद्र के साथ 6 अक्टूबर को होने वाली वार्ता से हटने की घोषणा की. संगठनों का आरोप है कि लोकतांत्रिक आंदोलन को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है और संवैधानिक सुरक्षा की बात से सरकार पीछे हट रही है.

24 सितंबर की गोलीबारी और कर्फ़्यू के बाद यह मुद्दा सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं रहा, बल्कि लद्दाख की राजनीति और भविष्य की दिशा तय करने वाला बड़ा विवाद बन गया है.

news desk

Recent Posts

अवधपुरम समर प्रीमियर लीग : समद के ऑलराउंड प्रदर्शन से ‘द ब्लास्टर्स’ बने चैंपियन

लखनऊ। कप्तान समद खान की तूफानी पारी (25 गेंदों में 87 रन) और धारदार गेंदबाजी…

1 hour ago

Sheikh Hasina : ‘मौत की सजा मंजूर, पर इसी साल बांग्लादेश लौटूंगी’-भारत में रह रहीं शेख हसीना का यूनुस-BNP सरकार पर सबसे बड़ा हमला

नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में मचे भारी राजनीतिक घमासान और तख्तापलट के बाद भारत में शरण…

2 hours ago

Cash Holdings In India: UPI के दौर में अचानक क्यों बढ़ी 100 और 200 के नोटों की डिमांड? भारतीय घरों में कैश जमा होने की ये है असली वजह

नई दिल्ली। स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट (UPI) के इस दौर में जहां जेब में वॉलेट…

2 hours ago

ऑपरेशन सिंदूर पर सियासत तेज, 6 सैनिकों की शहादत पर सरकार vs विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 6 सैनिकों की पहचान को लेकर देश में…

3 hours ago