नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पिछले 17 दिनों से जारी सियासी घमासान और गतिरोध के बीच बड़ा मोड़ आया है। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर चौतरफा घिरी केंद्र सरकार अब इस विषय पर सदन में खुलकर चर्चा करने और जवाब देने को तैयार हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद लोकसभा में इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेंगे। स्पीकर जल्द ही उनके वक्तव्य का समय तय करेंगे।
हालांकि, इस बीच सरकार ने विपक्ष पर कड़ा रुख अपनाते हुए चर्चा को लेकर एक बड़ी शर्त भी सामने रख दी है।
‘चर्चा में हंगामा नहीं करेंगे, गारंटी दे विपक्ष’–किरेन रिजिजू
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सरकार छात्र आंदोलन और उससे जुड़े हर पहलू पर विस्तार से बात करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
“विपक्ष से हमारा साफ अनुरोध है कि जब सरकार जवाब देने को तैयार है, तो सदन में हंगामा नहीं होना चाहिए। कांग्रेस और विपक्षी सांसदों को यह भरोसा दिलाना होगा कि वे गृह मंत्री का बयान शांति से सुनेंगे।”
रिजिजू ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठाते हुए यह दावा भी किया कि छात्र आंदोलन के मुद्दे पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के बीच अंदरूनी मतभेद गहराए हुए हैं।
17 दिन से गतिरोध: खरगे बोले- “गृह मंत्री जनता के प्रतिनिधियों का कर रहे अपमान”
दूसरी ओर, विपक्ष गृह मंत्री के सीधे हस्तक्षेप पर अड़ा हुआ है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर सदन की अनदेखी का आरोप लगाया।
खरगे ने कहा, “हम पिछले 17 दिनों से लगातार मांग कर रहे हैं कि अमित शाह सदन में आएं और पीड़ित छात्रों के साथ हुए अन्याय पर अपनी बात रखें। लेकिन सरकार जानबूझकर भाग रही है। जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी करना लोकतंत्र का अपमान है। अगर सदन ठप है, तो इसके जिम्मेदार सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री हैं।”
अहम बिलों पर संकट: मानसून सत्र के बचे हैं सिर्फ 4 दिन
छात्र लाठीचार्ज पर मचे इस बवाल के कारण मानसून सत्र के केवल 4 कार्य दिवस बाकी रह गए हैं। इस राजनीतिक खींचतान का सीधा असर देश के कई दूरगामी और महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills) पर पड़ता दिख रहा है:
- महिला आरक्षण विधेयक
- परिसीमन (Delimitation) बिल
- विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन
इन अहम बिलों को पारित कराने को लेकर फिलहाल अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। सोमवार की लोकसभा कार्यसूची में भी इनमें से किसी भी बिल को शामिल नहीं किया जा सका।
राहुल गांधी से संपर्क, फिर भी नहीं बनी बात
सदन को पटरी पर लाने के लिए किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से दो बार व्यक्तिगत मुलाकात की और फोन पर भी बातचीत की। सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपने सहयोगियों के साथ-साथ विपक्ष को साधने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल गतिरोध पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा है।
अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष पर हैं कि वे गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए कौन सा समय तय करते हैं और क्या इसके बाद संसद में कामकाज सामान्य हो पाएगा।