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केरल बना भारत का पहला ‘चरम गरीबी मुक्त’ राज्य — करोड़ों की आबादी को मुफ्त राशन देने वाले देश में केरल ने कैसे मिटाई गरीबी की आखिरी रेखा?

भारत जहां 85 करोड़ लोगों को सरकार राशन दे रही है वहां किसी राज्य का ये दावा करना कि उनके यहां कोई भी अत्यंत गरीब नहीं है, ये चैंकाता भी है और सुखद अहसास भी देता है. ये उपलब्धि दक्षिण भारत के राज्य केरल ने हासिल किया है. केरल आधिकारिक तौर पर ‘चरम गरीबी मुक्त’ घोषित हो चुका है और ऐसा करने वाला यह भारत का पहला राज्य बन गया है.

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ‘केरल पिरवी दिवस’ पर यह ऐतिहासिक घोषणा की. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 64,000 से अधिक सबसे गरीब परिवारों को मिली एक नई जिंदगी की कहानी है. ये सफलता रातोंरात नहीं मिली. ये है ‘चरम गरीबी उन्मूलन परियोजना’ (Extreme Poverty Alleviation Project), जिसे 2021 में एक मिशन के तौर पर शुरू किया गया था.

आगे उन्होंने बताया सबसे बड़ी चुनौती थी की सबसे गरीब लोगों को पहचानना. राज्य ने स्थानीय समुदाय और महिला सशक्तीकरण समूह ‘कुटुंबश्री’ की मदद से घर-घर जाकर 64,006 परिवारों के लगभग 1.03 लाख व्यक्तियों की पहचान की.

इन पांच मानकों पर किया गया गरीबी मूल्यांकन

गरीबी को केवल आय से नहीं मापा गया. केरल मॉडल ने पांच प्रमुख आयामों पर फोकस किया. भोजन, स्वास्थ्य, आजीविका, शिक्षा, आवास. गरीबी पर केरल की इस जीत का रहस्य उसके मजबूत विकेंद्रीकृत शासन और लक्षित कल्याणकारी समन्वय में है.

सबसे पहले, वंचितों को राशन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता और पेंशन जैसे मूलभूत सरकारी दस्तावेज़ों से जोड़ा गया. उसके बाद बिना दस्तावेज़, कोई लाभ नहीं यह बाधा हटाई गई. ‘लाइफ हाउसिंग योजना’ के तहत आवास सहायता दी गई. लगभग 3,913 परिवारों को घर और 1,338 परिवारों को जमीन उपलब्ध कराई गई. लाभार्थियों के घरों को जियो-टैग किया गया ताकि हर चरण में निगरानी हो सके और सरकारी सहायता उन तक ही पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.

केरल क्यों है सबसे अलग?

केरल ने साबित कर दिया कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहयोग के माध्यम से गरीबी को हराया जा सकता है. नीति आयोग 2021 के अनुसार, केरल में पहले ही गरीबी दर 0.7% थी, जो देश में सबसे कम थी. अब अत्यधिक गरीबी का आंकड़ा शून्य है.

केरल का ये मॉडल दिखाता है कि गरीबी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए केवल पैसे देना काफी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, और आवास को एक साथ जोड़कर सभी चीजों का विकास करना आवश्यक है.

news desk

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