Karwa Chauth Moonrise Time: करवा चौथ पर चांद का इंतजार हर सुहागिन महिला के लिए खास होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूर्णिमा के मुकाबले करवा चौथ पर चांद देर से क्यों दिखाई देता है? इसके पीछे कोई रहस्य नहीं, बल्कि पृथ्वी और चंद्रमा की गति, चंद्रमा की अवस्था और उसकी कक्षा से जुड़ा विज्ञान है।
लखनऊ। करवा चौथ का त्योहार आते ही आसमान में चांद देखने का इंतजार शुरू हो जाता है। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को पूजा करती हैं और फिर चांद निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। कई बार निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर करवा चौथ का चांद इतनी देर से क्यों निकलता है?
दरअसल, चांद का देर से दिखाई देना एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है। पृथ्वी और चंद्रमा लगातार गति करते रहते हैं। यही वजह है कि चंद्रमा हर दिन लगभग एक ही समय पर नहीं निकलता। करवा चौथ के आसपास चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि वह सूर्यास्त के तुरंत बाद दिखाई देने के बजाय कुछ समय बाद नजर आता है। आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा विज्ञान।
1. पृथ्वी और चंद्रमा की गति से तय होता है चांद निकलने का समय
आमतौर पर हम कहते हैं कि चांद निकल रहा है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से देखें तो यह पृथ्वी और चंद्रमा की गति का परिणाम है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जबकि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इन दोनों गतियों के कारण हमें चंद्रमा अलग-अलग समय पर क्षितिज के ऊपर दिखाई देता है।
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसलिए आसमान में चांद और अन्य खगोलीय पिंड हमें सामान्य तौर पर पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए दिखाई देते हैं। जब चंद्रमा पूर्वी क्षितिज से ऊपर आता है, तो हम इसे चांद निकलना कहते हैं।
हालांकि, चंद्रमा की स्थिति लगातार बदलती रहती है। इस कारण उसका उदय समय भी हर दिन बदल जाता है।
2. हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी क्यों होती है?
चंद्रमा के निकलने के समय में बदलाव का एक प्रमुख कारण उसकी पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा है। चंद्रमा को पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 27.3 दिन लगते हैं। वहीं, अमावस्या से अगली अमावस्या तक का चंद्र चक्र लगभग 29.5 दिनों का होता है।
चंद्रमा की कक्षा में आगे बढ़ने के कारण पृथ्वी को उसके दोबारा उसी दिशा में आने तक थोड़ा अतिरिक्त घूमना पड़ता है। इसी वजह से चंद्रमा का उदय आमतौर पर पिछले दिन की तुलना में लगभग 50 मिनट देर से होता है।
हालांकि, यह केवल एक औसत है। वास्तविक अंतर हर दिन समान नहीं होता। चंद्रमा की कक्षा, पृथ्वी पर देखने वाले स्थान और मौसम के अनुसार उसके उदय के समय में कम या ज्यादा बदलाव हो सकता है।
3. पूर्णिमा के मुकाबले करवा चौथ पर चांद देर से क्यों दिखता है?
करवा चौथ हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह तिथि शरद पूर्णिमा के बाद आती है। पूर्णिमा के आसपास चंद्रमा लगभग सूर्यास्त के समय दिखाई देने लगता है, जबकि इसके बाद उसकी स्थिति बदलने के साथ चंद्रोदय का समय भी आगे खिसकता जाता है।
पूर्णिमा के बाद चंद्रमा प्रतिदिन अपनी कक्षा में आगे बढ़ता है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की आपसी स्थिति में बदलाव होता है। इसलिए चंद्रमा सूर्यास्त के समय के मुकाबले धीरे-धीरे देर से निकलने लगता है।
यही वजह है कि करवा चौथ की शाम चांद देखने के लिए महिलाओं को अक्सर सूर्यास्त के काफी देर बाद तक इंतजार करना पड़ता है।
4. क्या चांद हर शहर में एक ही समय पर निकलता है?
नहीं, चांद निकलने का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता। किसी स्थान पर चंद्रमा पहले दिखाई दे सकता है, जबकि दूसरे शहर में उसके उदय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
इसके पीछे भौगोलिक स्थिति और स्थानीय क्षितिज जैसे कारण होते हैं। शहर की स्थिति, अक्षांश और देशांतर के अलावा आसपास की ऊंची इमारतें, पहाड़ और अन्य बाधाएं भी चांद को देखने में देरी करा सकती हैं।
इसलिए करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय जानने के लिए अपने शहर का समय देखना जरूरी है। दिल्ली में चांद निकलने का समय लखनऊ, कानपुर, पटना या किसी दूसरे शहर के समय से अलग हो सकता है।
5. समय पर चांद निकलने के बाद भी क्यों नहीं दिखाई देता?
कई बार चंद्रमा क्षितिज के ऊपर आ चुका होता है, लेकिन आसमान में दिखाई नहीं देता। इसकी वजह बादल, धुंध, धूल या वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक कण हो सकते हैं।
इसके अलावा, यदि चंद्रमा के उदय की दिशा में ऊंची इमारतें या पहाड़ हों, तो वह कुछ समय तक नजरों से छिपा रह सकता है। ऐसे में चंद्रोदय का वास्तविक समय और आंखों से चांद दिखाई देने का समय अलग-अलग हो सकता है।
यही कारण है कि मौसम साफ होने के बावजूद किसी स्थान पर चांद कुछ देर से दिखाई दे सकता है।
6. करवा चौथ पर चांद का आकार क्यों बदलता दिखाई देता है?
चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है। पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा के दौरान हमें उसका प्रकाशित हिस्सा अलग-अलग मात्रा में दिखाई देता है। इसी से अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा जैसी अवस्थाएं बनती हैं।
करवा चौथ के आसपास चंद्रमा पूर्णिमा के बाद की अवस्था में होता है। इस दौरान उसका दिखाई देने वाला प्रकाशित हिस्सा धीरे-धीरे कम होता जाता है। इसे घटता हुआ चंद्रमा या कृष्ण पक्ष का चंद्रमा कहा जाता है।
चंद्रमा की यही बदलती स्थिति उसके उदय के समय में होने वाले बदलाव को समझने में भी मदद करती है।
7. करवा चौथ पर चांद निकलने का सही समय कैसे जानें?
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय जानने के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय खगोलीय कैलेंडर की मदद ली जा सकती है। ध्यान रखें कि किसी दूसरे शहर के लिए बताया गया समय आपके शहर पर लागू नहीं होता।
इसके अलावा, चंद्रोदय का समय और चांद के प्रत्यक्ष दिखाई देने का समय अलग हो सकता है। यदि आसमान में बादल हों या चंद्रमा की दिशा में कोई बाधा हो, तो निर्धारित समय के बाद भी चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है।
विज्ञान और परंपरा का अनूठा संगम है करवा चौथ
करवा चौथ पर चांद का इंतजार केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि परंपरा और भावनाओं से जुड़ा अवसर भी है। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करती हैं और इसके बाद व्रत खोलती हैं।
विज्ञान बताता है कि चंद्रमा का उदय समय पृथ्वी और चंद्रमा की गति, उनकी आपसी स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। वहीं, परंपरा इस प्रतीक्षा को विशेष महत्व देती है।
इसलिए करवा चौथ पर चांद का देर से दिखाई देना किसी असाधारण घटना का संकेत नहीं है। चंद्रमा अपनी नियमित गति से चलता रहता है। उसके उदय का समय बदलना प्रकृति के नियमों का ही हिस्सा है।