लॉरेंस बिश्नोई गैंग अब सिर्फ जमीनी अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इस गिरोह ने तकनीक को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र पुलिस की जॉइंट SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने खुलासा किया है कि यह गैंग अब कॉलिंग को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल और इनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन पर शिफ्ट हो चुका है।
हाई-टेक हुआ ‘क्राइम सिंडिकेट’
गैंग अब व्यापारियों और बिल्डरों को धमकाने के लिए Signal और Telegram जैसे एंड-टू-एंड इनक्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहा है। SIT के अनुसार, गैंग के सदस्य अब पीड़ितों को सीधे कॉल करने के बजाय ‘वॉइस नोट्स’ भेज रहे हैं। तकनीक का यह इस्तेमाल पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है क्योंकि सामान्य कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए इन्हें ट्रेस करना नामुमकिन के बराबर है। इस ‘डिजिटल शील्ड’ की वजह से अपराधी अपनी लोकेशन छिपाने में भी कामयाब हो रहे हैं।
इंदौर-भोपाल और महाराष्ट्र में ‘डिजिटल रेकी’
जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग का फोकस फिलहाल मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों पर है। हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल बिल्डर से 5 करोड़ रुपये की मांग इसका करंट एग्जांपल है। यह गैंग अब केवल धमकियां नहीं दे रहा, बल्कि सोशल मीडिया की मदद से पीड़ित के परिवार, उनके मूवमेंट और सुरक्षा की पूरी ‘डिजिटल प्रोफाइलिंग’ करता है, जिससे शिकार के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता।
फंडिंग का ‘हवाला’ और ग्लोबल कनेक्शन
वसूली का यह पैसा अब सीधे हाथों में नहीं लिया जाता। SIT ने रिपोर्ट दी है कि इनकी वसूली की रकम को डिजिटल वॉलेट्स और हवाला नेटवर्क के जरिए डायवर्ट किया जा रहा है। जांचकर्ताओं का शक है कि यह पैसा विदेशों में बैठे गैंग के मास्टरमाइंड्स तक पहुंच रहा है, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एडवांस्ड हथियारों की खरीद और सिंडिकेट को विस्तार देने में किया जा रहा है।
साइबर वॉरफेयर और पुलिस की तैयारी
इस नई चुनौती से निपटने के लिए साइबर सेल और SIT अब ग्लोबल एजेंसियों के साथ मिलकर इनक्रिप्टेड डेटा को डिकोड करने पर काम कर रही हैं। प्रशासन ने व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए सख्त अलर्ट जारी किया है:
अनजान इंटरनेशनल कॉल्स: किसी भी संदिग्ध विदेशी नंबर या इंटरनेट कॉल को रिसीव न करें।
तुरंत रिपोर्टिंग: वॉइस नोट या मैसेज के जरिए धमकी मिलने पर फौरन साइबर पुलिस को इन्फॉर्म करें।
सोशल प्राइवेसी: अपनी और अपने परिवार की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर पब्लिक करने से बचें।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का यह ‘डिजिटल अवतार’ सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यह साफ है कि अब अपराध की दुनिया केवल गलियों में नहीं, बल्कि साइबर स्पेस के अंधेरे कोनों से ऑपरेट हो रही है।