जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में मूसलाधार बारिश और अचानक आई विनाशकारी बाढ़ (Flash Flood) ने हाहाकार मचा दिया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बादल फटने के बाद तड़के 3 बजे आए इस सैलाब ने 1992 की भीषण आपदा की याद दिला दी है। इस प्राकृतिक कहर में अब तक कुल 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों गाड़ियां पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गईं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन को युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर बाढ़ की 5 सबसे बड़ी बातें (Key Highlights)
- 11 लोगों की मौत: पुंछ जिले के सुरनकोट में खराब मौसम और बाढ़ के कारण 10 लोगों की, जबकि राजौरी में एक महिला की मौत हो गई है। कई लोग अब भी लापता हैं।
- 250 गाड़ियां पानी में बहीं: राजौरी के बेला बस स्टैंड का निचला इलाका पूरी तरह डूब चुका है। यहां खड़ी करीब 200 से 250 कारें सैलाब में बह गईं, जिसका खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
- बस स्टैंड का वजूद खत्म: बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि राजौरी के मुख्य बस स्टैंड का अब नामोनिशान तक नहीं बचा है, चारों तरफ सिर्फ मलबे और पानी का राज है।
- सीएम उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता कीमती जानें बचाना है। प्रभावित लोगों को हरसंभव आर्थिक और प्रशासनिक मदद दी जाएगी।
- 7 जिलों में हाई अलर्ट: मौसम विभाग ने 19 से 23 जुलाई के बीच जम्मू, कठुआ, सांबा, राजौरी, डोडा, रामबन और किश्तवाड़ में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
तड़के 3 बजे आई ‘जल प्रलय’, घरों और दुकानों में घुसा मलबा
राजौरी और पुंछ में यह तबाही उस वक्त शुरू हुई जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे। सुबह करीब तीन बजे अचानक नदियों और पहाड़ी नालों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। देखते ही देखते बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों और बाजारों में घुस गया।
दो मकान पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गए। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों को अपनी जान बचाने के लिए छतों का सहारा लेना पड़ा। लोगों का कहना है कि बाढ़ में उनका सब कुछ बह गया है और वे पूरी तरह दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
सेना, NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में भारतीय सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात कर दिया गया है। जलमग्न हो चुके इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासन की सख्त अपील: जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अगले 4-5 दिनों तक नदी, नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से पूरी तरह दूर रहें। जब तक बहुत जरूरी न हो, घरों से बाहर न निकलें और यात्रा करने से बचें।
मौसम विभाग की डरावनी चेतावनी, आगे क्या होगा?
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 23 जुलाई तक मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और ज्यादा गंभीर हो गया है। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) की आशंका के चलते कई हाईवे को भी बंद किया जा सकता है। सरकार और स्थानीय विधायक लगातार कंट्रोल रूम के जरिए स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।