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Trending Newsलाइफस्टाइल

क्या आपका स्मार्टफोन आपके बच्चों के दिल को बीमार कर रहा है? जाने क्या है इसके पीछे का सच?

news desk
Last updated: January 31, 2026 7:12 pm
news desk
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जाने क्या है इसके पीछे का सच..
जाने क्या है इसके पीछे का सच..
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आज के दौर में स्मार्टफोन और टैबलेट बच्चों के लिए ‘खिलौने’ नहीं, बल्कि ‘जरूरत’ बन गए हैं। लेकिन ये डिजिटल लगाव एक साइलेंट किलर साबित हो सकता है। ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ की एक लेटेस्ट रिसर्च ने खतरे की घंटी बजा दी है इसे लेकर, रिसर्च के मुताबिक, जो बच्चे मोबाइल, टीवी या गेमिंग कंसोल पर घंटों चिपके रहते हैं, उनमें फ्यूचर में हार्ट डिजीज़ और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा सामान्य बच्चों से कहीं अधिक हो सकता है।

रिसर्च के चौंकाने वाले फैक्ट्स:
डेनमार्क के साइंटिस्ट ने 1,000 से अधिक बच्चों और टीनएजर्स पर स्टडी की। इसके नतीजे डराने वाले हैं: ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ता कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस (जो डायबिटीज की जड़ है) का कारण बन रहा है।

रिसर्च कहती है कि 10 साल के बच्चों में हर एक घंटा स्क्रीन टाइम बीमारी के रिस्क को 0.08 पॉइंट्स बढ़ाता है, लेकिन 18 साल तक पहुंचते-पहुंचते ये जोखिम 0.13 तक पहुंच जाता है।

देर रात तक स्क्रीन देखने से शरीर में ‘मेलाटोनिन’ (नींद का हार्मोन) कम बनता है। अधूरी नींद सीधे तौर पर दिल पर प्रेशर डालती है, जिससे कम उम्र में ही स्ट्रेस और हार्ट इश्यूज बढ़ रहे हैं।

बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब सख्ती नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट स्ट्रेटेजी’ की जरूरत है और उन्होंने कुछ टिप्स भी बताए है:

1- नो-डिजिटल ज़ोन: डाइनिंग टेबल और बेडरूम को ‘फोन-फ्री’ रखें। खाने के साथ फोन की आदत सबसे घातक बताई है एक्सपर्ट्स ने।
2- पक्का करें कि बच्चा दिन में कम से कम 1 घंटा पसीना बहाए। फिजिकल एक्टिविटी स्क्रीन के साइड-इफेक्ट्स को बेअसर करती है और उन्हें फ्रेश रखने में मदद करता है।
3- एक्सपर्ट्स का कहना है की अगर आप खुद घंटों स्क्रॉलिंग करेंगे, तो बच्चा भी वही सीखेगा। पहले अपना स्क्रीन टाइम मैनेज करें।
4- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले सभी गैजेट्स को ‘गुड नाइट’ कह दें।

एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा की सिर्फ स्क्रीन बंद कर देना सोल्यूशन नहीं है। बच्चों को ऐसी बाहरी एक्टिविटीज और हॉबीज़ से जोड़ें जो उन्हें गैजेट्स की याद न दिलाएं। अगर आपने आज उनकी डिजिटल आदतों को नहीं बदला, तो हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो जवानी में ही दिल की बीमारियों से जूझ रही होगी।

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