नई दिल्ली: भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली लौंग सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं मानी जाती, बल्कि इसे पारंपरिक तौर पर कई स्वास्थ्य लाभों से भी जोड़ा जाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि लौंग की तासीर गर्म मानी जाती है, तो क्या गर्मियों में इसका सेवन करना सही है? विशेषज्ञों और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार इसका जवाब मात्रा और सेवन के तरीके पर निर्भर करता है।
आयुर्वेद में लौंग को गर्म तासीर वाला मसाला माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि इसे गर्मियों में पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। सीमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन कई लोगों के लिए सामान्य रूप से किया जा सकता है। हालांकि जरूरत से ज्यादा सेवन कुछ लोगों में असहजता पैदा कर सकता है।
गर्मी के मौसम में लौंग का सेवन किया जा सकता है, लेकिन कम मात्रा में। इसे भोजन, काढ़े, चाय या माउथ फ्रेशनर की तरह सीमित मात्रा में लिया जाता है। शरीर की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसकी मात्रा अलग हो सकती है।
लौंग को पारंपरिक रूप से पाचन से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि यह पाचन प्रक्रिया को सक्रिय रखने और पेट से जुड़ी कुछ सामान्य असुविधाओं में मदद कर सकती है।
लौंग का उपयोग लंबे समय से मुंह की बदबू कम करने और मुंह को ताजगी देने के लिए किया जाता रहा है। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व मुंह की सफाई में मददगार माने जाते हैं।
लौंग में यूजीनॉल नामक यौगिक पाया जाता है, जिसे इसके प्रमुख सक्रिय तत्वों में गिना जाता है। इसे कई पारंपरिक उपयोगों से जोड़ा जाता है।
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