- नेतन्याहू के सत्ता परिवर्तन वाले बयान के बाद ईरान का पलटवार
- पानी, बिजली और तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को लेकर दी चेतावनी
- तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता
ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान की मौजूदा सत्ता को हटाने संबंधी चेतावनी के बाद तेहरान की ओर से कड़ा जवाब दिया गया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर हमला हुआ, तो इजरायल को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक नक्शा भी साझा किया, जिसमें इजरायल के कई अहम बुनियादी ढांचों को चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है।
ईरानी पक्ष की इस चेतावनी में केवल सैन्य ठिकानों के बजाय पानी की आपूर्ति, बिजली उत्पादन, तेल रिफाइनरी और परिवहन नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का भी उल्लेख है। इससे संकेत मिलता है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में ईरान इजरायल की जरूरी सेवाओं पर हमले की धमकी दे रहा है। हालांकि, यह एक राजनीतिक और सैन्य चेतावनी है, किसी वास्तविक हमले या उसके परिणाम की पुष्टि नहीं।
नेतन्याहू के बयान के बाद ईरान का पलटवार
ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने नेतन्याहू के उस बयान के जवाब में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान की मौजूदा सत्ता को हटाने की बात कही थी।
अजीजी ने कहा कि ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को निशाना बनाया गया, तो उसका जवाब दिया जाएगा। उनके बयान में इजरायल को एक घंटे से भी कम समय में रहने लायक नहीं छोड़ने जैसी कड़ी चेतावनी भी सामने आई है।
ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, अजीजी की ओर से साझा नक्शे में इजरायल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े कई स्थानों को चिह्नित किया गया है। हालांकि, नक्शे में स्थानों का उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं है कि उन पर हमला करने का कोई अंतिम सैन्य निर्णय लिया जा चुका है।
पानी और बिजली जैसे जरूरी ढांचे भी चर्चा में
ईरान की चेतावनी में इजरायल की नागरिक सुविधाओं और ऊर्जा व्यवस्था से जुड़े ढांचों का उल्लेख खास तौर पर किया गया है।
पानी को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्र: सोरेक, हदेरा, अशदोद और अशकेलोन के समुद्री जल शोधन संयंत्रों का नाम सामने आया है। इजरायल में समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की व्यवस्था जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
बिजली उत्पादन केंद्र: ओरोत राबिन और एश्कोल बिजली संयंत्रों का भी साझा नक्शे में उल्लेख किए जाने की बात कही गई है। इन जैसे प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने पर बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
तेल रिफाइनरी और ईंधन भंडारण: हाइफा और अशदोद के तेल एवं ईंधन संबंधी प्रतिष्ठानों का भी जिक्र किया गया है। ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का असर परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
डिमोना का परमाणु अनुसंधान केंद्र: ईरानी पक्ष की ओर से साझा नक्शे में डिमोना स्थित परमाणु अनुसंधान केंद्र को भी चिह्नित किए जाने की बात कही गई है। यह इजरायल के संवेदनशील रणनीतिक प्रतिष्ठानों में गिना जाता है।
पुल और परिवहन नेटवर्क: प्रमुख पुलों और सड़क संपर्कों का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे ढांचों को नुकसान पहुंचने पर लोगों की आवाजाही और माल परिवहन प्रभावित हो सकता है।
इन स्थानों का उल्लेख ईरानी पक्ष की चेतावनी से जुड़ा है। स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है कि इजरायल के इन सभी प्रतिष्ठानों पर हमला करने की कोई औपचारिक योजना बनाई गई है।
संघर्ष बढ़ा तो आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर
ईरान की चेतावनी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें बिजली, पानी और ऊर्जा जैसी बुनियादी सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है। यदि किसी संघर्ष में ऐसे ढांचों को नुकसान पहुंचता है, तो उसका असर केवल सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकता।
पानी की आपूर्ति, बिजली, ईंधन और परिवहन बाधित होने से आम नागरिकों, अस्पतालों, कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से नागरिक बुनियादी ढांचे को लेकर दी जाने वाली ऐसी धमकियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानी जाती हैं।
ईरान-इजरायल तनाव का आगे क्या होगा?
नेतन्याहू के बयान और अजीजी की चेतावनी ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, बयानबाजी को वास्तविक सैन्य कार्रवाई के बराबर नहीं माना जा सकता।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश अपने बयानों के बाद क्या कूटनीतिक या सैन्य कदम उठाते हैं। फिलहाल ईरान की ओर से दी गई चेतावनी और साझा नक्शे को संभावित जवाबी कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है।