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ईरान-अमेरिका संघर्ष: राष्ट्रपति ट्रंप के ‘यू-टर्न’ ने दुनिया को चौंकाया

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को पूरी तरह रोक सकता है। ट्रंप का यह बयान तब आया है जब अमेरिका अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल करने में स्पष्ट रूप से संघर्ष करता नजर आ रहा है।

ट्रंप का बयान: “समझौता जरूरी नहीं”

व्हाइट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध विराम के लिए ईरान के साथ किसी औपचारिक समझौते या बातचीत की आवश्यकता नहीं है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दिखा, जहाँ ट्रंप ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खुला रखना अकेले अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है।

आखिर पीछे क्यों हट रहा है अमेरिका?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह ‘यू-टर्न’ रणनीतिक जीत के बजाय बढ़ते दबाव का नतीजा है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • ईरान का आक्रामक प्रतिरोध: अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने घुटने नहीं टेके। जवाबी कार्रवाइयों ने युद्ध को लंबा खींच दिया, जिससे अमेरिका की “त्वरित विजय” की उम्मीदें धराशायी हो गईं।
  • तख्तापलट की विफलता: अमेरिका को उम्मीद थी कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने के बाद ईरान में ‘रिजीम चेंज’ होगा, लेकिन वहां की सरकार और व्यवस्था टस से मस नहीं हुई।
  • वैश्विक तेल संकट: ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से दुनिया की 25% ऊर्जा आपूर्ति ठप हो गई। अमेरिका इस रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने में नाकाम रहा है।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव: अमेरिका के भीतर ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है और ‘No Kings’ जैसे आंदोलनों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। साथ ही, NATO और खाड़ी देशों से भी अमेरिका को अपेक्षित सैन्य सहयोग नहीं मिला।

युद्ध का फ्लैशबैक: हमले से लेकर आर्थिक मार तक

इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा मिसाइल हमला किया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य कमर तोड़ना था, लेकिन इसके विपरीत ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर कड़े प्रहार किए।

आर्थिक प्रभाव: अमेरिकी ऊर्जा विभाग (US Energy Data) के अनुसार, इस युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है।

क्या यह ट्रंप की कोई नई कूटनीतिक चाल है या हार स्वीकार करने का एक तरीका? फिलहाल, जमीनी हकीकत यही बयां करती है कि अमेरिका एक बेहद खर्चीले और बेनतीजा युद्ध से बाहर निकलने की कोशिश में है।

news desk

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