नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। शुक्रवार देर रात तक भारतीय दल ने 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 23 पदक अपने नाम किए हैं। इसके बावजूद भारत पदक तालिका में 10वें स्थान पर बना हुआ है, जो राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 1934 के बाद सबसे खराब रैंक मानी जा रही है। अब भारतीय बॉक्सरों से पदकों की आखिरी उम्मीदें बाकी हैं।
भारत ने अब तक कुल 23 पदक जीतकर पदक तालिका में 10वां स्थान हासिल किया है। भारत से आगे ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, स्कॉटलैंड, नाइजीरिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और वेल्स हैं। ऑस्ट्रेलिया 55 स्वर्ण और कुल 128 पदकों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है।
यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले 1934 में भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया था, जहां सिर्फ एक कांस्य पदक के साथ 12वां स्थान मिला था। इसके बाद भारत कभी भी इतनी नीचे नहीं पहुंचा था। हालांकि बॉक्सिंग में कुछ और पदक आने की संभावना है, लेकिन रैंकिंग में बड़े सुधार की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।
भारत के प्रदर्शन में गिरावट की बड़ी वजह इस बार शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे प्रमुख खेलों का प्रतियोगिता में शामिल न होना माना जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत ने शूटिंग में 63 और कुश्ती में 49 स्वर्ण पदक जीते हैं। इन खेलों के नहीं होने का असर सीधे भारत की पदक संख्या पर पड़ा।
टूर्नामेंट के दौरान भारत को जूडो और एथलेटिक्स में बड़ी सफलता मिली। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। नीरज चोपड़ा ने पुरुष भाला फेंक में रजत पदक जीता, जबकि यशवीर सिंह ने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की।
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