भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक ट्यूजडे’ जैसा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में आई भारी सुनामी ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। महज कुछ घंटों के कारोबार में मार्केट का करीब 3 लाख करोड़ का मार्केट कैप स्वाहा हो गया। सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,250 के अहम सपोर्ट लेवल को बचाने में नाकाम रहा।
बाजार में क्यों आया यह भूचाल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम रॉकेट बन चुके हैं। जब-जब क्रूड महंगा होता है, भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के लिए आयात बिल बढ़ जाता है, महंगाई सिर उठाने लगती है और रुपया कमजोर होने लगता है। यही डर आज मार्केट पर पूरी तरह हावी था।
पश्चिम एशिया में तनाव और ग्लोबल ट्रेड रूट्स (जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर मंडराते खतरे ने सप्लाई चेन के ठप होने का डर पैदा कर दिया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स इस समय ‘रिस्क-ऑफ’ मोड में हैं यानी वे पैसा सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं।
बाजार के ब्लू-चिप शेयरों और टीसीएस (TCS) जैसे दिग्गजों में जमकर प्रॉफिट-बिकवाली हुई, जब हेवीवेट स्टॉक्स ही टूट जाएं, तो इंडेक्स को बचाना नामुमकिन हो जाता है।
अब आगे क्या?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि घबराहट में आकर अपने पोर्टफोलियो को बेचना इस समय सबसे बड़ी बेवकूफी होगी। ग्लोबल टेंशन और क्रूड की कीमतें जब तक शांत नहीं होतीं, मार्केट में यह वोलेटिलिटी बनी रहेगी।