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इंजीनियर की नौकरी छोड़ी, बिना कोचिंग UPSC में रचा इतिहास; IAS सुभंकर बाला की प्रेरणादायक सफलता कहानी

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल किया जाता है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन कुछ ही लोग अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं। आईएएस अधिकारी सुभंकर बाला की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष, संकल्प और मेहनत की मिसाल है। बचपन में देखा प्रशासनिक सेवा का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने अच्छी-खासी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी और बिना कोचिंग के UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की।

बचपन की एक घटना ने बदली जिंदगी की दिशा

सुभंकर बाला को आईएएस बनने की प्रेरणा बचपन में ही मिल गई थी। पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में जब वह कक्षा 7 में पढ़ते थे, उस समय एक माओवादी प्रभावित गांव में अशांति का माहौल था।

इस दौरान उन्होंने एक सब-डिविजनल ऑफिसर को घर-घर जाकर लोगों से बातचीत करते और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास करते देखा। इस घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने तय किया कि वह भी भविष्य में प्रशासनिक सेवा के जरिए समाज के लिए काम करेंगे।

NIT से इंजीनियरिंग, फिर शुरू हुआ कॉरपोरेट करियर

हालांकि, सुभंकर बाला ने अपने करियर की शुरुआत इंजीनियरिंग के क्षेत्र से की। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वारंगल से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

इसके बाद उन्हें बेंगलुरु स्थित टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स में इंटीग्रेटेड सर्किट डिजाइन इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिली। उनके पास एक सुरक्षित और बेहतर करियर था, लेकिन बचपन का आईएएस बनने का सपना अभी भी उनके मन में कायम था।

2018 में छोड़ी नौकरी, चुनी UPSC की राह

साल 2018 में सुभंकर बाला ने अपनी जिंदगी का बड़ा फैसला लिया। उन्होंने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने का निर्णय लिया।

खास बात यह रही कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। उन्होंने मानक किताबों, ऑनलाइन लेक्चर और अनुशासित अध्ययन योजना के जरिए अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया।

पहले प्रयास की असफलता से मिली सीख

यूपीएससी के पहले प्रयास में सुभंकर बाला ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि, उन्होंने इस असफलता को हार नहीं माना और अपनी तैयारी की कमियों को पहचानकर उनमें सुधार किया।

उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, वैकल्पिक विषय पर अधिक ध्यान दिया और उत्तर लेखन का नियमित अभ्यास शुरू किया।

रणनीति बदली और हासिल की बड़ी सफलता

सुभंकर बाला ने अपनी तैयारी को अधिक व्यवस्थित बनाया और प्रभावी अध्ययन योजना के साथ आगे बढ़े। उनकी मेहनत का परिणाम अगले प्रयास में देखने को मिला।

उन्होंने अपने वैकल्पिक विषय में 120 से अधिक अंकों का सुधार किया, जो उनकी सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 79 हासिल की और 2021 बैच के आईएएस अधिकारी बने।

SDO से लेकर डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर तक का सफर

आईएएस बनने के बाद सुभंकर बाला ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के डोमकल में सब-डिविजनल ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं।

वर्तमान में वह पश्चिम बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और प्रशासनिक सेवा के जरिए जनसेवा के अपने लक्ष्य को आगे बढ़ा रहे हैं।

vineet verma

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