नई दिल्ली: भारत में जनगणना 2027 की प्रक्रिया इस बार कई बड़े बदलावों के साथ शुरू होने जा रही है। 17 अगस्त से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें पहली बार डिजिटल माध्यम से लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी। इस बार नागरिकों से जाति और माता-पिता के जन्मस्थान से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
17 अगस्त से शुरू होगा जनगणना का दूसरा चरण
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होगा। हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ राज्यों के लिए समयसीमा अलग रखी गई है।
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगी। वहीं, आम नागरिकों के लिए 17 अगस्त से 30 अगस्त तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पहली बार जनगणना में दर्ज होगी जाति की जानकारी
आजादी के बाद पहली बार सामान्य जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। यह जानकारी पूरी तरह उत्तरदाता के बताए गए विवरण के आधार पर दर्ज की जाएगी।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए डिजिटल सिस्टम में ड्रॉप डाउन विकल्प उपलब्ध होगा, जहां लोग अपनी जाति का चयन कर सकेंगे। वहीं, अन्य वर्गों के लोगों के लिए जाति दर्ज करने का अलग विकल्प दिया जाएगा।
इस कदम को देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की भी मांगी जाएगी जानकारी
जनगणना 2027 के फॉर्म में एक और अहम बदलाव किया गया है। पहली बार लोगों से उनके माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह जानकारी जनसंख्या संरचना और नागरिकता से जुड़े आंकड़ों को समझने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल इस जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं की जाएगी।
घर बैठे भर सकेंगे जनगणना का फॉर्म
डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए इस बार स्व-गणना की सुविधा दी जा रही है। नागरिक 17 अगस्त से 30 अगस्त के बीच se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
इसके लिए लोगों को जनगणनाकर्मी के घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम से समय की बचत होगी और आंकड़ों की सटीकता भी बेहतर होगी।
जाति बताने के लिए नहीं देना होगा कोई प्रमाण पत्र
जनगणना के दौरान जाति की जानकारी देने के लिए किसी भी सरकारी दस्तावेज या प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी। उत्तरदाता जो जाति बताएगा, उसे उसी आधार पर दर्ज किया जाएगा।
जाति के नाम की स्पेलिंग भी वही दर्ज की जाएगी, जो जवाब देने वाला बताएगा। किसी भी जानकारी के सत्यापन के लिए अलग से प्रमाण पेश करना अनिवार्य नहीं होगा।
डिजिटल तकनीक से दूर होंगी पुरानी चुनौतियां
साल 2011 की सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना के दौरान स्व-घोषणा के आधार पर 45 हजार से ज्यादा जातियों के नाम सामने आए थे, जिससे आंकड़ों को व्यवस्थित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
इस बार सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल टूल्स की मदद से डेटा को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की तैयारी कर रही है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और नीतियों को तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
NPR को जनगणना 2027 से रखा गया अलग
इस बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को जनगणना 2027 की प्रक्रिया से अलग रखा गया है। जनगणना का दूसरा चरण देश की भविष्य की नीतियों, विकास योजनाओं और सामाजिक आंकड़ों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।
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