नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल बीमारियों में डायबिटीज सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है। जिन लोगों के परिवार में पहले से डायबिटीज के मरीज हैं, उनमें इस बीमारी का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फैमिली हिस्ट्री होने का मतलब यह नहीं कि बीमारी होना तय है। समय रहते सही जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
परिवार में डायबिटीज होने पर क्यों बढ़ जाता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, खासतौर पर टाइप-2 डायबिटीज में आनुवंशिक कारण अहम भूमिका निभाते हैं। अगर माता-पिता या भाई-बहन को डायबिटीज है तो शरीर में इंसुलिन के असर कम होने या ग्लूकोज को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे लोगों को सामान्य से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
वजन नियंत्रित रखना सबसे जरूरी
अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी डायबिटीज का बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। शरीर का वजन संतुलित रखने और कमर के बढ़ते आकार पर नियंत्रण रखने से बीमारी की संभावना कम की जा सकती है।
रोजाना शारीरिक गतिविधि बनाएं आदत
हर दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना, योग, साइक्लिंग या किसी भी प्रकार की नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और वजन संतुलित करने में भी सहायता मिलती है।
खानपान में करें छोटे लेकिन असरदार बदलाव
डाइट में फाइबर से भरपूर चीजें जैसे दलिया, ओट्स, हरी सब्जियां और संतुलित भोजन शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। अधिक शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। भोजन में हेल्दी फैट और प्रोटीन का संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
समय-समय पर कराएं जरूरी जांच
अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर ब्लड शुगर की जांच कराना फायदेमंद हो सकता है। फास्टिंग शुगर और HbA1c जैसे टेस्ट शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद कर सकते हैं।
तनाव और नींद को न करें नजरअंदाज
लंबे समय तक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल बदलावों को बढ़ा सकता है, जो डायबिटीज के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। नियमित नींद और तनाव प्रबंधन भी बचाव का अहम हिस्सा माना जाता है।
मीठे पेय और जंक फूड से बनाएं दूरी
कोल्ड ड्रिंक, अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स और जंक फूड का ज्यादा सेवन शरीर में इंसुलिन के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में इनका सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।
इन लक्षणों को हल्के में न लें
बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना और लगातार थकान जैसे संकेत दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।