गाजियाबाद: नंदग्राम की रहने वाली बबीता शर्मा के सामने एक समय परिवार चलाने और तीन बेटों के भविष्य को संवारने की बड़ी चुनौती थी। पति ने जिम्मेदारियों से दूरी बना ली तो बच्चों की पूरी जिम्मेदारी बबीता के कंधों पर आ गई। आर्थिक मुश्किलों के बीच उन्होंने सड़क किनारे ठेला लगाकर पूजा सामग्री बेचने से शुरुआत की। छोटी पूंजी से शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ा और आज बबीता अपनी दुकान चला रही हैं। उनकी कहानी अब गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभार्थियों का जिक्र करते हुए बबीता शर्मा का नाम भी लिया।
जब तीन बेटों की जिम्मेदारी अकेले उठानी पड़ी
वर्ष 2022 में कोविड काल के दौरान बबीता की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। उनके पति वेल्डिंग का काम करते हैं, लेकिन उन्होंने बबीता और बच्चों की जिम्मेदारी से दूरी बना ली। इसके बाद तीन बेटों की परवरिश और पढ़ाई का पूरा भार बबीता पर आ गया।
हालात बिगड़ने पर वह बच्चों को लेकर अपने मायके नंदग्राम आ गईं। वहां तीनों बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता सामने थी। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कारोबार शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी जुटाना भी संभव नहीं था। इसके बावजूद बबीता ने काम शुरू करने का फैसला किया।
सड़क किनारे ठेले से शुरू हुआ कारोबार
बबीता ने बहुत कम पूंजी में सड़क किनारे ठेला लगाकर सामान बेचना शुरू किया। इसी ठेले पर उन्होंने पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री भी रखनी शुरू की। धीरे-धीरे ग्राहक उनके पास पूजा सामग्री खरीदने आने लगे।
समस्या यह थी कि सीमित पूंजी के कारण उनके पास पूरा सामान उपलब्ध नहीं रहता था। कई ग्राहक अपनी जरूरत की पूरी सामग्री नहीं मिलने पर वापस लौट जाते थे। बबीता कारोबार बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन पैसों की कमी उनके सामने सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी।
10 हजार रुपये के कर्ज से मिली कारोबार को आगे बढ़ाने की राह
वर्ष 2022 में किसी माध्यम से बबीता को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें पहली बार 10 हजार रुपये का ऋण मिला।
रकम भले ही छोटी थी, लेकिन बबीता के लिए कारोबार बढ़ाने का यह पहला बड़ा अवसर था। उन्होंने इस पूंजी का इस्तेमाल अपने काम को आगे बढ़ाने में किया। ठेले से शुरू हुआ कारोबार धीरे-धीरे एक खोखे तक पहुंच गया।
बबीता ने पहला ऋण समय पर चुका दिया। इसके बाद उन्होंने दोबारा योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण मिला। कारोबार आगे बढ़ा तो उन्होंने तीसरी बार 50 हजार रुपये का ऋण लिया।
ठेले से किराये की दुकान तक पहुंचा सफर
बढ़ती पूंजी के साथ बबीता के कारोबार का दायरा भी बढ़ता गया। आखिरकार उन्होंने बाजार में किराये पर दुकान लेकर पूजा सामग्री का कारोबार शुरू कर दिया।
जिस काम की शुरुआत कभी सड़क किनारे एक छोटे से ठेले से हुई थी, वह अब दुकान तक पहुंच चुका है। बबीता के लिए यह बदलाव सिर्फ कारोबार बढ़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारी संभालने का अवसर भी मिला।
‘मन की बात’ में नाम आने पर भावुक हुईं बबीता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ‘मन की बात’ में अपना नाम लिए जाने पर बबीता ने इसे अपने जीवन का खास पल बताया। उनका कहना है कि जिस समय उनके सामने आगे बढ़ने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं था, उस समय प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद की।
बबीता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने लिए माता-पिता जैसा मानती हैं। उनका कहना है कि योजना के जरिए मिले अवसर की वजह से आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में अपना नाम सुना जाना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा।
प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में स्वनिधि योजना के लाभार्थियों का उल्लेख करते हुए बताया कि योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इसका लाभ लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
गाजियाबाद प्रशासन ने भी बबीता की कहानी को बताया प्रेरक
बबीता शर्मा का नाम प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में आने के बाद गाजियाबाद प्रशासन की ओर से भी इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया गया। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा कि बबीता की कहानी जिले की हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।
मुख्यमंत्री की ओर से भी बबीता की सफलता की सराहना किए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन का मानना है कि बबीता जैसी कहानियां सरकारी योजनाओं के जरिए लोगों को मिले अवसरों को जमीन पर दिखाती हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की है। इसके लिए जिलाधिकारी कार्यालय, डूडा, नगर निगम और विकास भवन से संपर्क किया जा सकता है।
महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। बबीता का सफर दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बीच भी छोटे स्तर से शुरू किया गया कारोबार लगातार मेहनत और उपलब्ध आर्थिक मदद के सहारे आगे बढ़ सकता है।