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Reading: रिश्तों में धोखा देने वालों की पहचान कैसे करें? चाणक्य नीति में बताए गए स्वार्थी लोगों के 3 बड़े संकेत
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धर्म

रिश्तों में धोखा देने वालों की पहचान कैसे करें? चाणक्य नीति में बताए गए स्वार्थी लोगों के 3 बड़े संकेत

vineet verma
Last updated: June 4, 2026 10:13 am
vineet verma
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नई दिल्ली: जीवन में कई बार सबसे गहरे घाव किसी विरोधी से नहीं, बल्कि उन लोगों से मिलते हैं जिन पर हम आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। दोस्ती, रिश्तेदारी या पेशेवर जीवन में ऐसे लोग अक्सर हमारे आसपास मौजूद रहते हैं जो जरूरत के समय बेहद करीब दिखाई देते हैं, लेकिन हालात बदलते ही अपना असली रंग दिखा देते हैं। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में ऐसे स्वार्थी लोगों की पहचान को लेकर महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन केवल उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और स्वभाव से करना चाहिए।

Contents
जरूरत से ज्यादा तारीफ करने वाले लोगों से रहें सावधानतारीफ और चापलूसी के बीच अंतर समझना जरूरीसिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करने वाले लोग भी हो सकते हैं स्वार्थीसच्चे रिश्तों में होता है दोनों तरफ से सहयोगदूसरों की बुराई करने वालों पर आंख बंद कर भरोसा न करेंविश्वसनीय व्यक्ति की यही होती है पहचान

आज के दौर में, जब रिश्ते तेजी से बनते और टूटते हैं, चाणक्य की ये सीख पहले से अधिक प्रासंगिक नजर आती है। आइए जानते हैं उन तीन संकेतों के बारे में, जिनके जरिए स्वार्थी और मतलबी लोगों को पहचाना जा सकता है।

जरूरत से ज्यादा तारीफ करने वाले लोगों से रहें सावधान

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति बिना किसी विशेष कारण के लगातार आपकी प्रशंसा करता है या हर समय आपकी तारीफों के पुल बांधता रहता है, उससे सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसे लोग अक्सर अपने वास्तविक उद्देश्य को छिपाने के लिए मीठे शब्दों का सहारा लेते हैं।

व्यवहारिक जीवन में भी देखा जाता है कि कुछ लोग तभी आपकी खूबियां गिनाने लगते हैं जब उन्हें आपसे किसी लाभ की उम्मीद होती है। उनकी बातों में मिठास जरूर होती है, लेकिन उसमें सच्चाई और निष्पक्षता का अभाव होता है। चाणक्य के अनुसार, सच्चा हितैषी आपकी अच्छाइयों के साथ-साथ आपकी कमियों की ओर भी ध्यान दिलाता है, जबकि स्वार्थी व्यक्ति केवल चापलूसी करता है।

तारीफ और चापलूसी के बीच अंतर समझना जरूरी

हर प्रशंसा गलत नहीं होती, लेकिन जब किसी की बातें जरूरत से ज्यादा बनावटी और उद्देश्यपूर्ण लगने लगें तो सावधान हो जाना चाहिए। कई बार यही अत्यधिक प्रशंसा आगे चलकर विश्वासघात का कारण बनती है।

सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करने वाले लोग भी हो सकते हैं स्वार्थी

चाणक्य नीति के अनुसार, स्वार्थी लोगों की दूसरी बड़ी पहचान उनका व्यवहार होता है। ऐसे लोग सामान्य परिस्थितियों में संपर्क नहीं रखते, लेकिन जैसे ही उन्हें किसी मदद, सिफारिश या निजी काम की जरूरत होती है, उनका व्यवहार अचानक बेहद अपनापन भरा हो जाता है।

अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग महीनों तक कोई हालचाल नहीं पूछते, लेकिन अपने किसी काम के समय सबसे पहले संपर्क करते हैं। काम पूरा होने के बाद उनका व्यवहार फिर पहले जैसा हो जाता है। यह प्रवृत्ति रिश्तों में असंतुलन का संकेत मानी जाती है।

सच्चे रिश्तों में होता है दोनों तरफ से सहयोग

स्वस्थ और मजबूत संबंधों की पहचान यह है कि उनमें संवाद, सहयोग और सम्मान दोनों ओर से हो। यदि कोई व्यक्ति हमेशा केवल अपने फायदे के लिए रिश्ता निभाता है और बदले में कभी साथ नहीं देता, तो यह उसके स्वार्थी स्वभाव का संकेत हो सकता है।

दूसरों की बुराई करने वालों पर आंख बंद कर भरोसा न करें

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति हर समय दूसरों की आलोचना करता रहता है, उस पर सोच-समझकर विश्वास करना चाहिए। ऐसे लोग परिस्थितियों के अनुसार अपनी बातें बदलते रहते हैं। वे एक व्यक्ति के सामने दूसरे की बुराई करते हैं और फिर दूसरे के सामने पहले व्यक्ति की।

ऐसे लोगों का उद्देश्य संबंधों को मजबूत करना नहीं, बल्कि अपने हित साधना होता है। कई बार यही लोग रिश्तों में गलतफहमी, विवाद और अविश्वास की वजह भी बनते हैं।

विश्वसनीय व्यक्ति की यही होती है पहचान

विश्वसनीय और चरित्रवान व्यक्ति दूसरों की अनुपस्थिति में भी उनका सम्मान बनाए रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति लगातार किसी न किसी की निंदा करने में लगा रहता है, तो यह उसके व्यक्तित्व और सोच के बारे में बहुत कुछ बताता है। चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगों से उचित दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।

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