इम्पोर्टेन्ट पॉइंट्स
- 107 दिन बाद युद्धविराम: 19 जून को जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते पर होंगे हस्ताक्षर।
- समुद्री बारूद का खतरा: ईरान ने बिछाई हैं समुद्री माइंस, रास्ता पूरी तरह साफ होने में लग सकता है 30 दिन का समय।
- इकोनॉमिक इम्पैक्ट: इराक को होगा सबसे बड़ा फायदा; 600 जहाज और भारत के 13 टैंकर अभी भी फंसे।
तेहरान/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी भीषण जंग के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है। ‘शांति समझौते’ (Peace Treaty) के तहत दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है।
वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। लेकिन क्या इस रास्ते के खुलने से वैश्विक ऊर्जा संकट रातों-रात खत्म हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के नीचे बिछा बारूद और ईरान की नई ‘टैक्स नीति’ अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।
होर्मुज डील: 5 बड़े सवाल और उनके जवाब
1. क्या इजराइल के लिए बंद रहेगा रास्ता?
यद्यपि डील के तहत होर्मुज को सभी देशों के लिए खोलने का फैसला हुआ है, लेकिन ईरान का रुख कड़ा है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इजराइली जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई इजराइली टैंकर इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो ईरान उस पर हमला कर सकता है।
2. ‘समुद्री जाम’ और बारूद की सफाई: कब तक शुरू होगा व्यापार?
भले ही आदेश जारी हो गए हों, लेकिन होर्मुज अभी सुरक्षित नहीं है। युद्ध के दौरान ईरान ने समुद्र के नीचे भारी मात्रा में विस्फोटक (Mines) लगा रखे हैं।
- 30 दिनों का समय: अमेरिकी विशेषज्ञों और शिपिंग संगठनों का अनुमान है कि ‘डी-माइनिंग’ यानी बारूद साफ करने में कम से कम एक महीना लगेगा।
- ट्रैफिक का खतरा: शिपिंग संगठनों ने चेतावनी दी है कि रास्ता खुलते ही 600 से अधिक फंसे हुए जहाजों के एक साथ निकलने से ‘मैरीटाइम ट्रैफिक जाम’ लग सकता है।
3. क्या जहाजों को देना होगा ‘पर्यावरण टैक्स’?
यहाँ डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच विरोधाभास दिख रहा है।
- ट्रंप का दावा: कोई टोल या टैक्स नहीं लगेगा।
- ईरान का प्लान: ईरान के वार्ता दल के मुताबिक, ईरान और ओमान मिलकर ‘पर्यावरण टैक्स’ के नाम पर टोल वसूलने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक शिपिंग लागत बढ़ सकती है।
4. ‘ऑयल किंग’ इराक की होगी वापसी?
होर्मुज खुलने का सबसे बड़ा विजेता इराक होगा।
- जंग से पहले इराक रोजाना 33 मिलियन बैरल तेल बेच रहा था, जो अब घटकर मात्र 10 मिलियन बैरल रह गया है।
- सऊदी अरब जैसे अन्य देशों के पास वैकल्पिक रास्ते थे, लेकिन इराक पूरी तरह होर्मुज पर निर्भर है। अब उसकी अर्थव्यवस्था को नई जान मिलेगी।
5. फंसे हुए जहाजों और भारत की स्थिति?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में होर्मुज में 600 बड़े कमर्शियल जहाज और तेल टैंकर फंसे हुए हैं।
- भारत पर असर: भारत के करीब 13 जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में फंसे हुए हैं, जिनके जल्द ही भारत लौटने की उम्मीद है। इससे भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिलेगी।
19 जून पर टिकी हैं दुनिया की नजरें
जिनेवा में 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर इस बात की पुष्टि करेंगे कि क्या ईरान अपने वादे पर कायम रहता है। अमेरिकी हमले के विरोध में बंद किया गया यह मार्ग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फिर से ‘ऑक्सीजन’ का काम करेगा, बशर्ते सुरक्षा और टैक्स जैसे विवादों को सुलझा लिया जाए।