वाशिंगटन/बीजिंग । इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे की मैराथन बैठक के विफल होने के बाद, खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब वैश्विक स्तर पर फैल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी के ऐलान के बाद अब चीन ने भी इस विवाद में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।
चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वाशिंगटन को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के जहाज इस क्षेत्र में लगातार आवाजाही कर रहे हैं और बीजिंग अपने ऊर्जा हितों की रक्षा करेगा।
इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा रहने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा की तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि परमाणु मुद्दे और होर्मुज पर असहमति के कारण अमेरिका अब सख्त सैन्य कदम उठाएगा।
ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को निर्देश दिया है कि वे उन सभी जहाजों को रोकें जिन्होंने ईरान को किसी भी प्रकार का ‘अवैध टोल’ दिया है।
ट्रंप ने ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को नष्ट करने और प्रतिरोध करने वाले किसी भी ईरानी सैन्य बल को ‘तबाह’ करने की चेतावनी दी है।
इस बीच, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने उन खबरों को ‘बेबुनियाद’ बताया है जिनमें दावा किया गया था कि चीन गुपचुप तरीके से ईरान को आधुनिक हथियार और सैन्य तकनीक मुहैया करा रहा है। गुओ ने कहा कि चीन अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के प्रति सजग है और सैन्य निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है।
अगर ट्रंप प्रशासन वास्तव में होर्मुज की घेराबंदी करता है और चीन अपने व्यापारिक हितों के लिए अड़ा रहता है, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही $100 के पार निकल चुकी हैं, और अब महाशक्तियों का यह टकराव आग में घी डालने का काम कर रहा है।
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