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केरल : 78% turnout, शांतिपूर्ण मतदान… फिर भी सीट-वार आंकड़े गायब, कांग्रेस के सवाल से   सियासी बहस तेज

तिरुवनंतपुरम, 13 अप्रैल 2026 — केरल में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 9 अप्रैल को एक चरण में सभी 140 सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो गया था। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार कुल मतदान प्रतिशत 78.03% से 78.27% के बीच दर्ज किया गया, जो 2021 के चुनाव (लगभग 74-76%) से काफी अधिक है और पिछले तीन दशक में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है।

महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा (लगभग 80.86% महिलाएं, 75.01% पुरुष और 57.04% ट्रांसजेंडर वोटर)। कोझीकोड जिले में सबसे अधिक (80.83%) और पठानमथिट्टा में सबसे कम मतदान दर्ज हुआ। कुल 2.71 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले राज्य में 883 उम्मीदवार मैदान में थे।

हालांकि मतदान को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी तक सीट-वार (constituency-wise) अंतिम मतदान प्रतिशत, वोट प्रतिशत और पोस्टल बैलट के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। केवल प्रारंभिक/अनुमानित आंकड़े उपलब्ध हैं।

कांग्रेस नेता और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने इस देरी पर गहरी चिंता जताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि सभी प्रमाणित और विस्तृत डेटा तुरंत सार्वजनिक किए जाएं।

सतीशन ने पत्र में लिखा, “मतदान समाप्त हुए तीन दिन बीत चुके हैं, फिर भी निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर सीट-वार मतदान डेटा, वोट प्रतिशत और पोस्टल बैलट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह डेटा जल्द से जल्द जारी करना अत्यंत जरूरी है, ताकि जनता चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा रख सके।”

उन्होंने कहा कि विस्तृत आंकड़ों की अनुपलब्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। विपक्षी दलों का कहना है कि विशेष रूप से Special Intensive Revision (SIR) ऑफ वोटर लिस्ट के बाद यह चुनाव महत्वपूर्ण है, इसलिए हर आंकड़े की तुरंत जांच और सार्वजनिकता जरूरी है।

चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण बताया था और पूरे राज्य में लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इसे “लोकतंत्र की ऐतिहासिक भागीदारी” करार दिया था। अब तक आयोग की ओर से इस देरी पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।

मतगणना 4 मई 2026 को होगी। इस बीच विस्तृत मतदान आंकड़ों की अनुपलब्धता पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) दोनों ही उच्च मतदान को अपने पक्ष में बता रहे हैं।

news desk

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