'मुझे निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं...',
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नजर आए। कथित शराब घोटाला मामले से जुड़ी एक अहम सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने किसी वकील का सहारा लेने के बजाय खुद अपनी दलीलें पेश कीं।
उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस कोर्ट से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है और जस्टिस शर्मा को इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए।
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अदालत की पिछली कुछ टिप्पणियों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। केजरीवाल ने तर्क दिया, “संजय सिंह, के कविता और मनीष सिसोदिया के मामलों में इस कोर्ट ने जो टिप्पणियां की हैं, वे किसी अंतिम फैसले जैसी लगती हैं। मुझे तो लगभग ‘महाभ्रष्ट’ घोषित कर दिया गया था, ऐसा लगा जैसे दोष सिद्ध हो चुका है और बस सजा सुनाना ही बाकी रह गया है।”
केजरीवाल ने अदालत के सामने अपनी आशंकाओं के 10 प्रमुख कारण गिनाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्याय के सिद्धांत के अनुसार, मुद्दा यह नहीं है कि जज पक्षपाती है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या आरोपी के मन में पक्षपात की कोई ‘ठोस आशंका’ है।
केजरीवाल ने विशेष रूप से 9 मार्च के आदेश का जिक्र किया, जिसमें हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें दी गई राहत पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा: ट्रायल कोर्ट ने 40,000 पन्नों के सबूतों को पढ़ने के बाद मुझे आरोपमुक्त किया था।
लेकिन इस अदालत ने महज 10 मिनट की सुनवाई में, बिना मेरा पक्ष सुने, उस आदेश को “खामियों वाला” बताकर स्टे लगा दिया। यह जल्दबाजी और दूसरे पक्ष की अनदेखी मेरे मन में गहरा संदेह पैदा करती है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की सभी बातों को सुना और उन्हें रिकॉर्ड पर लिया। जब केजरीवाल ने कहा कि उन्हें “महाभ्रष्ट” मान लिया गया है, तो जज ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा, “यह आपकी अपनी सोच है, मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करूंगी।” फिलहाल, अदालत ने इस रिक्यूसल अर्जी पर अपनी कार्यवाही जारी रखी है।
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