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100 दिन की तनातनी के बाद राहत की उम्मीद! अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर दुनिया का रिएक्शन, जानिए किस देश ने क्या कहा?

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद सामने आए शांति समझौते के ऐलान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शुरुआती सहमति के बाद कई देशों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता लौट सकती है। इस घटनाक्रम को वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी अहम माना जा रहा है।

कतर ने कहा- बातचीत और स्थिरता की दिशा में अहम कदम

कतर ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बातचीत का माहौल और मजबूत होगा और तनाव की जगह सहयोग बढ़ेगा।

तुर्की ने बताया क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद

तुर्की की ओर से कहा गया कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए नया अवसर बन सकता है। साथ ही सभी पक्षों से शांति प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाने की अपील की गई।

ब्रिटेन ने समुद्री सुरक्षा और लागू करने पर दिया जोर

ब्रिटेन ने इसे युद्ध जैसे हालात कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम कदम बताया। साथ ही कहा कि इसका असली असर तभी दिखेगा जब समझौते को पूरी तरह लागू किया जाएगा।

जर्मनी ने इसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया

जर्मनी ने इस समझौते को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि इससे आर्थिक भरोसा लौट सकता है और क्षेत्रीय तनाव कम होने की संभावना बढ़ेगी।

फ्रांस ने कहा- अब तेजी से लागू हो समझौता

फ्रांस ने इस समझौते को जल्द प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही माना कि व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आगे की बातचीत बेहद अहम होगी।

क्या अब हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे?

हालांकि शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर आगे बातचीत की जरूरत बनी रहेगी। सुरक्षा, व्यापार, समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय आने वाले चरणों में तय किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि लंबे समाधान की शुरुआत हो सकती है।

अब दुनिया की नजर अगले कदम पर

समझौते के ऐलान के बाद वैश्विक स्तर पर उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले समय में तनाव कम होगा और आर्थिक गतिविधियां फिर रफ्तार पकड़ेंगी। हालांकि सभी की नजर अब इस बात पर है कि यह सहमति जमीन पर कितनी तेजी से असर दिखाती है।

vineet verma

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