वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक ‘शांति समझौते’ (US-Iran Peace Deal) का एलान किया है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा लीक किए गए 14-सूत्रीय प्रस्ताव के मुताबिक, इस डील में ईरान को एक या दो नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर महा-राहत मिलने जा रही है।
इस सौदे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय सहयोगी सशस्त्र समूहों (जैसे हिजबुल्लाह/हूती) पर बिना किसी समझौते के, $324 अरब डॉलर (करीब 27 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम आर्थिक फायदा उठाने में कामयाब होता दिख रहा है।
आइए जानते हैं कि इस प्रस्तावित डील के तहत तेहरान को क्या-क्या मिलने जा रहा है और इसके मुख्य बिंदु क्या हैं।
इस समझौते का सबसे बड़ा आर्थिक पहलू ईरान का वित्तीय फायदा है। मसौदे के अनुसार:
पश्चिमी देशों की हमेशा यह कोशिश रही है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नकेल कसी जाए। लेकिन इस नए MoU में ईरान बाजी मारता दिख रहा है। शर्तों के मुताबिक, आगामी वार्ताओं में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके सहयोगी संगठनों को मिल रहे समर्थन को चर्चा के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। बातचीत सिर्फ एनरिच्ड यूरेनियम और आर्थिक प्रतिबंधों तक ही सीमित रहेगी।
ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका तेल क्षेत्र है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान खुलकर तेल नहीं बेच पा रहा था। नए समझौते के तहत:
समझौते की चौथी बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका, ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का दखल नहीं देगा। इसके अलावा, अमेरिका को 30 दिनों के भीतर ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी अतिरिक्त सेना को वापस बुलाना होगा और बातचीत के दौरान वह क्षेत्र में कोई नया सैन्य जमावड़ा या नए प्रतिबंध नहीं लगा सकेगा।
इस शांति समझौते को केवल दो देशों के बीच का करार न रखकर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के जरिए कानूनी रूप से लागू करने की योजना है।
कब और कहाँ होंगे हस्ताक्षर? यह समझौता कुल 3 चरणों में पूरा होगा। 14 जून को MoU की प्रारंभिक घोषणा के बाद, आगामी 19 जून (शुक्रवार) को जेनेवा में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस बैठक में ईरान की ओर से गालिबाफ और अब्बास अराघची, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) शामिल होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “यह महान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरीके से खुलने से दुनिया के लिए तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो जाएगी।”
दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए बयान जारी किया, “तेहरान के लोगों और सेना के अथक प्रयासों के चलते ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर जीत हासिल कर ली है।”
हालांकि, मेहर न्यूज द्वारा लीक की गई इन 14 शर्तों पर अभी दोनों देशों की सरकारों द्वारा आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। आने वाले 60 दिनों की अंतिम बातचीत में तय होगा कि ऊँट किस करवट बैठता है।
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