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अमेरिका-ईरान पीस डील: मिसाइल प्रोग्राम पर बिना झुके ईरान को मिलेंगे $324 अरब? ट्रंप के ‘महा-समझौते’ की 5 सबसे बड़ी बातें

बड़ी बातें
  • ऐतिहासिक समझौता: ट्रंप सरकार और ईरान के बीच 4 महीने से जारी युद्ध को रोकने के लिए प्रारंभिक MoU पर सहमति।
  • ईरान की बड़ी जीत: परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर पूरी छूट के साथ $300 अरब का पुनर्निर्माण पैकेज और $24 अरब की फ्रीज संपत्ति मिलेगी।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: समझौते के तहत समुद्री नाकेबंदी हटेगी, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई फिर से सुचारू होगी।

वाशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक ‘शांति समझौते’ (US-Iran Peace Deal) का एलान किया है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा लीक किए गए 14-सूत्रीय प्रस्ताव के मुताबिक, इस डील में ईरान को एक या दो नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर महा-राहत मिलने जा रही है।

इस सौदे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय सहयोगी सशस्त्र समूहों (जैसे हिजबुल्लाह/हूती) पर बिना किसी समझौते के, $324 अरब डॉलर (करीब 27 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम आर्थिक फायदा उठाने में कामयाब होता दिख रहा है।

आइए जानते हैं कि इस प्रस्तावित डील के तहत तेहरान को क्या-क्या मिलने जा रहा है और इसके मुख्य बिंदु क्या हैं।

1. $300 अरब का पुनर्निर्माण पैकेज और $24 अरब की फ्रीज संपत्ति की रिहाई

इस समझौते का सबसे बड़ा आर्थिक पहलू ईरान का वित्तीय फायदा है। मसौदे के अनुसार:

  • पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका और उसके सहयोगी देश युद्ध से प्रभावित हुए ईरान को दोबारा खड़ा करने के लिए 300 अरब डॉलर का फंड देंगे।
  • फ्रीज एसेट्स की वापसी: विदेशों में फंसी ईरान की 24 अरब डॉलर की संपत्ति को रिलीज किया जाएगा।
  • ईरान की शर्त: ईरान ने साफ कर दिया है कि अंतिम बातचीत तभी शुरू होगी जब इस 24 अरब डॉलर में से आधी रकम ($12 अरब) उसे तुरंत एडवांस के तौर पर दे दी जाएगी।

2. मिसाइल प्रोग्राम और डिफेंस एजेंडे से बाहर

पश्चिमी देशों की हमेशा यह कोशिश रही है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नकेल कसी जाए। लेकिन इस नए MoU में ईरान बाजी मारता दिख रहा है। शर्तों के मुताबिक, आगामी वार्ताओं में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके सहयोगी संगठनों को मिल रहे समर्थन को चर्चा के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। बातचीत सिर्फ एनरिच्ड यूरेनियम और आर्थिक प्रतिबंधों तक ही सीमित रहेगी।

3. तेल प्रतिबंधों से मुक्ति और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का खुलना

ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका तेल क्षेत्र है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान खुलकर तेल नहीं बेच पा रहा था। नए समझौते के तहत:

  • ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध सस्पेंड किए जाएंगे।
  • अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) हटाएगा।
  • इसके बदले में ईरान दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खोल देगा।

4. संप्रभुता का सम्मान: अमेरिकी सेना की होगी वापसी

समझौते की चौथी बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका, ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का दखल नहीं देगा। इसके अलावा, अमेरिका को 30 दिनों के भीतर ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी अतिरिक्त सेना को वापस बुलाना होगा और बातचीत के दौरान वह क्षेत्र में कोई नया सैन्य जमावड़ा या नए प्रतिबंध नहीं लगा सकेगा।

5. UNSC की मुहर और जेनेवा में हस्ताक्षर

इस शांति समझौते को केवल दो देशों के बीच का करार न रखकर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के जरिए कानूनी रूप से लागू करने की योजना है।

कब और कहाँ होंगे हस्ताक्षर? यह समझौता कुल 3 चरणों में पूरा होगा। 14 जून को MoU की प्रारंभिक घोषणा के बाद, आगामी 19 जून (शुक्रवार) को जेनेवा में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस बैठक में ईरान की ओर से गालिबाफ और अब्बास अराघची, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) शामिल होंगे।

ट्रंप बनाम तेहरान: किसने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “यह महान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरीके से खुलने से दुनिया के लिए तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो जाएगी।”

दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए बयान जारी किया, “तेहरान के लोगों और सेना के अथक प्रयासों के चलते ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर जीत हासिल कर ली है।”

हालांकि, मेहर न्यूज द्वारा लीक की गई इन 14 शर्तों पर अभी दोनों देशों की सरकारों द्वारा आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। आने वाले 60 दिनों की अंतिम बातचीत में तय होगा कि ऊँट किस करवट बैठता है।

news desk

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