वैश्विक तनाव और कमजोर एशियाई संकेतों के बीच हफ्ते के दौरान भारतीय शेयर बाजार में जबर्दस्त गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में भड़के जियोपॉलिटिकल तनाव, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों “FIIs” की चौतरफा बिकवाली ने घरेलू बाजार के सेंटीमेंट्स को बुरी तरह प्रभावित किया।
सत्र के अंत में बीएसई (BSE) का बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) और एनएससी (NSE) का निफ्टी (Nifty) भारी नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए।
गिरावट के 3 प्रमुख कारण
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष और अनिश्चितता के माहौल ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में डर का माहौल बना दिया है। अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण दुनिया भर के निवेशक जोखिम वाले एसेट्स (जैसे इक्विटी मार्केट) से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों (जैसे सोना और अमेरिकी डॉलर) में लगा रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चैन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड के दामों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। तेल के दाम बढ़ने से भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) और घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा जाती है।
FIIs की लगातार निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार नेट सेलर बने हुए हैं। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और डॉलर इंडेक्स की स्थिति को देखते हुए विदेशी फंड भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी वापस खींच रहे हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार के सूचकांकों पर पड़ रहा है।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे!
बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। आईटी और एफएमसीजी जैसे रक्षात्मक सेक्टर्स ने भी गिरावट को रोकने में बहुत सीमित भूमिका निभाई।
वोलेटिलिटी इंडेक्स में उछाल, बाजार में निवेशकों के डर और घबराहट को मापने वाला इंडेक्स यानी India VIX तेजी से ऊपर चढ़ा है। यह दर्शाता है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में स्थितियां सामान्य नहीं होतीं और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं पड़तीं, तब तक बाजार में ऐसा ही दबाव बना रह सकता है। एक्सपर्ट्स ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी है कि, जल्दबाजी में पैनिक सेलिंग न करें। एकमुश्त बड़ा निवेश करने के बजाए SIP या टुकड़ों में खरीदारी की रणनीति अपनाएं। केवल मजबूत फंडामेंटल और कम कर्ज वाली कंपनियों के शेयरों पर ही ध्यान केंद्रित करें।